Site icon Prsd News

राहुल गांधी नागरिकता मामले में नया मोड़, लखनऊ हाईकोर्ट ने FIR आदेश पर रोकी मुहर

download 8 15

कांग्रेस नेता Rahul Gandhi से जुड़े कथित दोहरी नागरिकता मामले में एक बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया है। Allahabad High Court की लखनऊ पीठ ने अपने ही पहले दिए गए आदेश पर रोक लगाते हुए मामले की सुनवाई को आगे बढ़ा दिया है। इस फैसले ने राजनीतिक और कानूनी हलकों में नई बहस छेड़ दी है।

दरअसल, इससे पहले अदालत ने प्रारंभिक सुनवाई में उत्तर प्रदेश पुलिस को राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दिया था। अदालत ने माना था कि उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर prima facie कुछ आरोप ऐसे हैं जिनकी जांच जरूरी है। यह मामला कथित तौर पर ब्रिटिश नागरिकता से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी ने विदेश में एक कंपनी के दस्तावेजों में खुद को ब्रिटिश नागरिक बताया था।

हालांकि, बाद में अदालत ने अपने आदेश को अंतिम रूप देने से पहले कानूनी पहलुओं पर दोबारा विचार किया। न्यायमूर्ति ने पाया कि इस तरह के मामलों में संबंधित पक्ष को सुनवाई का अवसर देना जरूरी है। इसी आधार पर अदालत ने पहले दिए गए FIR के निर्देश को फिलहाल रोक दिया और कहा कि बिना नोटिस दिए किसी भी आरोपी के खिलाफ अंतिम फैसला लेना उचित नहीं होगा।

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन जरूरी है, जिसमें किसी भी व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। इसी वजह से अदालत ने अब दोनों पक्षों को सुनने के बाद ही आगे का फैसला लेने की बात कही है।

यह पूरा मामला एक याचिका से शुरू हुआ था, जिसे कर्नाटक के एक भाजपा कार्यकर्ता ने दायर किया था। याचिका में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी के पास दोहरी नागरिकता है और इस आधार पर उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई होनी चाहिए। इससे पहले लखनऊ की विशेष MP-MLA अदालत ने इस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा।

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए नई तारीख तय कर दी है, जहां यह तय किया जाएगा कि क्या FIR दर्ज करने का आदेश दिया जाए या नहीं। इस बीच, यह मामला राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील बना हुआ है, क्योंकि यह सीधे तौर पर एक बड़े राष्ट्रीय नेता से जुड़ा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस केस का असर सिर्फ राहुल गांधी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह नागरिकता और जनप्रतिनिधियों की पात्रता से जुड़े बड़े कानूनी सवालों को भी प्रभावित कर सकता है। आने वाले दिनों में अदालत का अंतिम फैसला इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगा।

Exit mobile version