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राहुल गांधी की सुप्रीम कोर्ट याचिका में मिलीं 14 खामियां, ₹220 की फीस भी कम; SIR पर रोक समेत की गईं 10 मांगें

o5qjd3rk rahul gandhi 625x300 13 October 26

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक के नेताओं की ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में 14 खामियां सामने आई हैं। इनमें कोर्ट फीस में 220 रुपये की कमी, कुछ जरूरी कानूनी दस्तावेजों का न होना और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की अस्पष्ट फोटोकॉपी शामिल है। इन आपत्तियों के चलते याचिका पर सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ने से पहले दस्तावेजों में सुधार करना जरूरी हो गया है।

यह याचिका मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर दाखिल की गई है। राहुल गांधी के साथ इसमें मल्लिकार्जुन खड़गे, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, संजय राउत और अन्य विपक्षी नेताओं के नाम शामिल हैं। याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के अन्य अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है। विपक्ष ने मतदाता सूची में नाम हटाए जाने और पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने याचिका की जांच के दौरान कुल 14 प्रक्रियागत खामियां दर्ज कीं। इनमें नौ याचिकाकर्ताओं की ओर से जरूरी वकालतनामे जमा न होना, कुछ दस्तावेजों के पन्ने गायब होना, पन्नों की नंबरिंग में गड़बड़ी और कुछ प्रतियों का स्पष्ट न होना शामिल है। इसके अलावा, कुछ दस्तावेजों की रंगीन प्रतियां जमा नहीं की गई थीं और कुछ पन्नों का टेक्स्ट पढ़ने में भी परेशानी बताई गई। इन कमियों को दूर करने के बाद ही याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।

याचिका में विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट से SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की है। साथ ही चुनाव आयोग से पुनरीक्षण से संबंधित सभी रिकॉर्ड उपलब्ध कराने और प्रक्रिया की संवैधानिक वैधता की जांच करने का अनुरोध किया गया है। विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची में नाम हटाए जाने के मामलों की स्वतंत्र ऑडिट कराने और कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई है। ये सभी याचिकाकर्ताओं की ओर से रखी गई मांगें हैं, जिन पर अदालत का फैसला आना बाकी है।

विपक्ष की याचिका में मतदाताओं की शिकायतों के निपटारे के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने और SIR से जुड़े निर्णयों की जांच कराने की मांग भी शामिल है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए। वहीं, चुनाव आयोग की प्रक्रिया और उसके फैसलों की वैधता से जुड़े सवालों पर अंतिम निर्णय न्यायिक समीक्षा के बाद ही होगा।

याचिका दाखिल करने से पहले INDIA ब्लॉक के कई नेता दिल्ली में मार्च करते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। विपक्षी नेताओं ने मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात कर अपनी चिंताएं रखने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें याचिका के माध्यम से अदालत का रुख करने को कहा गया। इसके बाद विपक्ष की कानूनी टीम ने याचिका दाखिल की। इस घटनाक्रम ने SIR और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया।

रजिस्ट्री की ओर से बताई गई खामियां याचिका की प्रक्रिया और दस्तावेजों से जुड़ी हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने SIR को लेकर विपक्ष के आरोपों को सही या गलत ठहरा दिया है। याचिकाकर्ताओं को पहले सभी आपत्तियों का समाधान करना होगा। इसके बाद अदालत याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने और उठाए गए मुद्दों पर विचार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है।

अब आगे की कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि याचिकाकर्ताओं की कानूनी टीम 14 खामियों को कितनी जल्दी दूर करती है। इसके बाद ही SIR पर रोक, मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं की जांच और चुनाव आयोग के फैसलों की समीक्षा जैसी मांगों पर अदालत में सुनवाई का रास्ता साफ हो सकता है। फिलहाल, मामले में कोई अंतिम न्यायिक निर्णय सामने नहीं आया है।

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