राजस्थान में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने नशे के कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक ऐसे अवैध ड्रग्स निर्माण केंद्र का भंडाफोड़ किया है, जिसे एक मकान की छत पर संचालित किया जा रहा था। यह फैक्ट्री सीमा से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित थी, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ गई है। पुलिस की छापेमारी के दौरान मौके से बड़ी मात्रा में एमडी (मेफेड्रोन) ड्रग्स बनाने में इस्तेमाल होने वाले रसायन, उपकरण और अन्य सामग्री बरामद की गई है। कार्रवाई के दौरान एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी ने मकान की छत पर अस्थायी प्रयोगशाला तैयार कर रखी थी, ताकि आसपास के लोगों को किसी तरह का संदेह न हो। यहां सिंथेटिक ड्रग्स तैयार कर उसे विभिन्न राज्यों तक पहुंचाने की साजिश रची जा रही थी। पुलिस को लंबे समय से इस क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिल रही थी, जिसके बाद खुफिया जानकारी के आधार पर छापेमारी की गई। अधिकारियों का मानना है कि यह केवल स्थानीय स्तर का मामला नहीं है, बल्कि इसके तार एक बड़े ड्रग्स तस्करी नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि फैक्ट्री में तैयार होने वाली नशीली सामग्री की सप्लाई किन-किन राज्यों तक की जा रही थी और क्या इसका संबंध सीमा पार से होने वाली तस्करी से भी है। भारत-पाकिस्तान सीमा लंबे समय से हथियारों और मादक पदार्थों की तस्करी के लिहाज से संवेदनशील मानी जाती रही है। हाल के वर्षों में ड्रोन और अन्य आधुनिक तरीकों के जरिए नशे की खेप भारत में भेजने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे में सीमा के इतने करीब अवैध ड्रग्स फैक्ट्री का मिलना सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता का विषय माना जा रहा है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ की जा रही है और उसके मोबाइल फोन, बैंक लेनदेन तथा अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। इसके अलावा यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस अवैध कारोबार को वित्तीय सहायता कौन दे रहा था और इसमें कितने लोग शामिल हैं। फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम ने मौके से मिले रसायनों और तैयार पदार्थों के नमूने जांच के लिए भेज दिए हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कितनी मात्रा में नशीले पदार्थ का उत्पादन किया जा रहा था।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में इस तरह की अवैध गतिविधियां केवल कानून-व्यवस्था का ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का भी गंभीर मुद्दा हैं। यदि ऐसे नेटवर्क समय रहते नहीं पकड़े जाएं तो इनका इस्तेमाल संगठित अपराध और सीमा पार संचालित तस्करी गिरोहों द्वारा किया जा सकता है। यही कारण है कि राज्य पुलिस, नारकोटिक्स एजेंसियां और केंद्रीय सुरक्षा बल अब पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने के लिए संयुक्त रूप से जांच कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।
