बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। 15 अक्टूबर को अदालत ने ₹2 करोड़ जमा किए जाने के बाद उनके पासपोर्ट को रिलीज करने का निर्देश दिया, जिससे वह पेशेवर काम के लिए विदेश जा सकेंगे। साथ ही, अदालत ने लंबे समय से चल रहे वित्तीय विवाद को आपसी सहमति से सुलझाने के लिए मध्यस्थता का रास्ता अपनाने को कहा है।
यह मामला फिल्म अता पता लापता से जुड़े वित्तीय लेनदेन और चेक बाउंस होने के विवाद से संबंधित है। वर्ष 2010 में फिल्म बनाने के लिए राजपाल यादव ने कथित तौर पर दिल्ली की एक कंपनी से करीब ₹5 करोड़ का कर्ज लिया था। फिल्म के बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं करने के बाद कर्ज चुकाने में परेशानी हुई और समय के साथ ब्याज तथा अन्य शुल्कों के कारण बकाया रकम बढ़कर करीब ₹9 करोड़ तक पहुंचने की बात सामने आई।
इस विवाद में राजपाल यादव और उनकी पत्नी के खिलाफ सात चेक बाउंस मामलों में कार्रवाई हुई थी। दिल्ली हाई कोर्ट ने पहले अभिनेता को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक मामले में तीन महीने की कैद की सजा सुनाई थी। इस आदेश को चुनौती देते हुए राजपाल यादव ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जहां उन्हें बकाया रकम जमा करने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर की शुरुआत में राजपाल यादव को ₹2 करोड़ जमा करने का निर्देश दिया था। सुनवाई के दौरान उन्होंने ₹1.15 करोड़ का डिमांड ड्राफ्ट पेश किया था, जबकि शेष ₹85 लाख जमा कराने की बात कही गई थी। अदालत के निर्देश के अनुसार, बाकी रकम भी 13 अक्टूबर तक जमा कराई जानी थी। बाद में अदालत को बताया गया कि कुल ₹2 करोड़ कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा कर दिए गए हैं।
15 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि रकम जमा होने के बाद विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने की संभावना पर विचार किया जा सकता है। अदालत ने दोनों पक्षों को मध्यस्थता के लिए भेजने का फैसला किया, ताकि बकाया भुगतान और अन्य वित्तीय मुद्दों पर सहमति बनाने की कोशिश हो सके। हालांकि, मध्यस्थता का आदेश अपने आप में पूरे विवाद के समाप्त होने या सभी बकाया चुक जाने की पुष्टि नहीं करता।
अदालत ने राजपाल यादव का पासपोर्ट रिलीज करने के लिए संबंधित निचली अदालत को निर्देश भी दिया। इससे अभिनेता के लिए विदेश में फिल्म की शूटिंग जैसे पेशेवर कामों के सिलसिले में यात्रा का रास्ता खुला है। हालांकि, विदेश यात्रा के लिए निचली अदालत की ओर से तय शर्तों का पालन करना होगा और यात्रा के बाद संबंधित निर्देशों के मुताबिक वापस रिपोर्ट करना भी जरूरी हो सकता है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने राजपाल यादव को काम करके अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने और विवाद का समाधान निकालने की दिशा में आग
