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राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर सियासत तेज, केजरीवाल ने SIT पर उठाए सवाल; जांच में कई नए खुलासे

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अयोध्या स्थित राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे से जुड़े कथित गबन और चोरी के मामले ने अब बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। इस प्रकरण को लेकर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने उत्तर प्रदेश सरकार और जांच एजेंसियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विशेष जांच दल (SIT) का गठन केवल लोगों को गुमराह करने के लिए किया गया है और वास्तविक दोषियों तक पहुंचने की कोशिश नहीं की जा रही। केजरीवाल ने कहा कि भगवान राम के भक्तों द्वारा श्रद्धा से चढ़ाया गया धन और आभूषण यदि चोरी हुए हैं तो यह केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि आस्था के साथ विश्वासघात है।

मामले की जांच कर रही एसआईटी ने अब तक कई अहम जानकारियां जुटाई हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, चढ़ावे की गिनती और उसके रखरखाव से जुड़े तंत्र में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। इस मामले में आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और उनसे पूछताछ जारी है। जांच के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होने की भी जानकारी सामने आई है। शुरुआती रिपोर्टों में सुरक्षा व्यवस्था की खामियां, निगरानी प्रणाली की कमजोरी और मानक संचालन प्रक्रियाओं के उल्लंघन की बात भी कही गई है।

वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार और भाजपा नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ रही है और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। सरकार का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को बचाने का प्रयास नहीं किया जा रहा है तथा जांच के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय होगी। एसआईटी ने कुछ वायरल दावों को भी खारिज किया है और लोगों से अपुष्ट सूचनाओं पर भरोसा न करने की अपील की है।

इस पूरे घटनाक्रम ने राष्ट्रीय राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है। विपक्षी दल लगातार इस मामले की उच्च स्तरीय या न्यायिक निगरानी में जांच की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस ने भी इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में जांच कराने की मांग उठाई है। दूसरी ओर, भाजपा इसे राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास बता रही है। आने वाले दिनों में एसआईटी की विस्तृत रिपोर्ट और जांच के निष्कर्ष इस संवेदनशील मामले की दिशा तय कर सकते हैं।

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