महाराष्ट्र की राजनीति में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे के एक मंच पर आने के बाद नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इसी बीच केंद्रीय मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के प्रमुख रामदास आठवले ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि वह भविष्य में देवेंद्र फडणवीस और उद्धव ठाकरे को हमेशा के लिए एक साथ लाने की कोशिश कर सकते हैं। आठवले के इस बयान ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है।
रामदास आठवले ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत के दौरान दोनों नेताओं की हालिया मुलाकात का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राज ठाकरे ने एक दिन के लिए फडणवीस और उद्धव ठाकरे को एक मंच पर ला दिया। उनके मुताबिक, पहले इन दोनों नेताओं को एक साथ मंच साझा करते देखना मुश्किल लगता था, लेकिन अब ऐसा संभव हुआ है। आठवले ने कहा कि वह भी भविष्य में दोनों नेताओं को स्थायी रूप से साथ लाने का प्रयास कर सकते हैं।
दरअसल, 29 अक्टूबर को मुंबई में मराठी राजनीतिक कार्टूनों पर आधारित पुस्तक ‘महाराष्ट्राच्या हास्यरेषा’ के विमोचन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे एक साथ नजर आए थे। इस कार्यक्रम में तीनों नेताओं के बीच हल्की-फुल्की बातचीत और राजनीतिक तंज भी देखने को मिले। लंबे समय बाद इन नेताओं की एक साथ मौजूदगी ने महाराष्ट्र की राजनीति में खास ध्यान खींचा।
कार्यक्रम के दौरान देवेंद्र फडणवीस ने उद्धव ठाकरे के साथ अपने पुराने संबंधों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 2019 तक जब भी उद्धव ठाकरे उन्हें बुलाते थे, वह उनसे मिलने जाते थे, लेकिन 2019 के बाद उन्हें बुलावा नहीं आया। फडणवीस ने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह अब भी उनके बुलावे का इंतजार कर रहे हैं। उनके इस बयान पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने प्रतिक्रिया दी और माहौल हल्का-फुल्का हो गया।
राज ठाकरे ने भी इस दौरान मजाकिया टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री 2029 तक पद पर बने रहते हैं, तो उन्हें ऐसे कार्यक्रमों में बार-बार बुलाया जा सकता है। वहीं फडणवीस ने महाराष्ट्र में अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं के एक मंच पर आने को राज्य की राजनीतिक परंपरा बताया। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद नेता सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों में साथ आ सकते हैं।
हालांकि, इस मुलाकात को किसी नए राजनीतिक गठबंधन या बीजेपी और उद्धव ठाकरे के बीच सुलह का संकेत नहीं माना जा सकता। कार्यक्रम मूल रूप से एक पुस्तक विमोचन समारोह था। फडणवीस, उद्धव और राज ठाकरे की बातचीत के बाद राजनीतिक अटकलें जरूर तेज हुई हैं, लेकिन तीनों नेताओं की ओर से किसी नए गठबंधन की औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।
महाराष्ट्र में 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर बीजेपी और अविभाजित शिवसेना का गठबंधन टूट गया था। इसके बाद उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ मिलकर महाविकास अघाड़ी सरकार बनाई थी। जून 2022 में शिवसेना में बगावत हुई और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में अलग गुट बीजेपी के साथ आ गया। इन घटनाओं ने राज्य की राजनीति और दलों के समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया।
रामदास आठवले का ताजा बयान ऐसे समय आया है, जब सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन में भी कुछ मुद्दों को लेकर बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के नेताओं के बीच बयानबाजी देखने को मिल रही है। हालिया विधान परिषद चुनावों के नतीजों के बाद गठबंधन के भीतर एक-दूसरे पर आरोप लगाए गए हैं। ऐसे राजनीतिक माहौल में आठवले की मध्यस्थता की पेशकश ने नई चर्चा छेड़ दी है। हालांकि, फडणवीस और उद्धव ठाकरे को स्थायी रूप से साथ लाने की उनकी बात फिलहाल एक राजनीतिक इच्छा और दावा ही है, किसी तय राजनीतिक समझौते का संकेत नहीं।
