वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के बीच भारत ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अब तेजी से अपने सोने के भंडार को विदेशों से वापस देश में ला रहा है। यह कदम न केवल आर्थिक सुरक्षा बल्कि वैश्विक अनिश्चितताओं से बचाव के रूप में भी देखा जा रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत ने पिछले कुछ महीनों में अपने गोल्ड रिजर्व का बड़ा हिस्सा देश के भीतर स्थानांतरित कर लिया है। RBI के आंकड़ों के मुताबिक, देश के कुल सोने का लगभग 77% हिस्सा अब भारत में सुरक्षित रखा जा चुका है, जबकि पहले इसका बड़ा हिस्सा लंदन और अन्य विदेशी तिजोरियों में रखा जाता था।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम वैश्विक हालात को देखते हुए उठाया गया है। अमेरिका-ईरान संघर्ष, रूस-यूक्रेन युद्ध और कई देशों द्वारा संपत्तियों को फ्रीज किए जाने जैसी घटनाओं ने केंद्रीय बैंकों के भरोसे को प्रभावित किया है। ऐसे में अब देश अपनी संपत्ति पर सीधा नियंत्रण रखना चाहते हैं। दरअसल, सोना एक “सेफ हेवन” यानी सुरक्षित निवेश माना जाता है।
जब दुनिया में राजनीतिक या आर्थिक अस्थिरता बढ़ती है, तो देश और निवेशक सोने पर भरोसा बढ़ा देते हैं। यही वजह है कि RBI ने भी अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए सोने की हिस्सेदारी को बढ़ाया है और उसे देश के भीतर सुरक्षित रखने पर जोर दिया है।
जानकारों के मुताबिक, अगर सोना देश के भीतर रहता है, तो जरूरत के समय उसे तुरंत इस्तेमाल किया जा सकता है। चाहे आर्थिक संकट हो, विदेशी मुद्रा का दबाव हो या युद्ध जैसी स्थिति—ऐसे समय में यह भंडार देश के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम करता है।
इस फैसले के पीछे एक बड़ा कारण “ट्रस्ट फैक्टर” भी माना जा रहा है। पहले विकसित देशों के वित्तीय सिस्टम पर भरोसा ज्यादा था, इसलिए भारत समेत कई देश अपना सोना विदेशों में रखते थे। लेकिन अब बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच यह भरोसा धीरे-धीरे कम होता दिख रहा है।
वहीं, अमेरिका-ईरान युद्ध का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, सप्लाई चेन में बाधा और मुद्रास्फीति जैसी समस्याएं बढ़ी हैं। ऐसे हालात में सोने की मांग और महत्व दोनों बढ़ गए हैं। हाल के आंकड़ों के मुताबिक, RBI ने अक्टूबर 2025 से मार्च 2026 के बीच करीब 100 टन से ज्यादा सोना वापस मंगाया है। यह संकेत देता है कि भारत अब अपनी आर्थिक सुरक्षा को लेकर अधिक सतर्क और आत्मनिर्भर रणनीति अपना रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों का ट्रेंड बनता जा रहा है। कई देश अब अपने सोने को विदेशों से निकालकर अपने नियंत्रण में ला रहे हैं, ताकि किसी भी वैश्विक संकट के समय वे सुरक्षित रह सकें।
कुल मिलाकर, RBI का यह कदम सिर्फ आर्थिक नीति नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच एक मजबूत रणनीतिक संकेत है—जहां अब “सुरक्षा” का मतलब केवल विदेशी तिजोरियों में संपत्ति रखना नहीं, बल्कि उसे अपने नियंत्रण में रखना बनता जा रहा है।
