उत्तराखंड जाने वाले यात्रियों और चारधाम जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए आने वाले समय में सफर काफी आसान हो सकता है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है और हाल ही में इसमें एक और बड़ा इंजीनियरिंग माइलस्टोन हासिल हुआ है। 125 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन में एस्केप टनल-1 का ब्रेकथ्रू पूरा हो चुका है। यह 10.847 किलोमीटर लंबी सुरंग है और परियोजना में अब तक 41वां टनल ब्रेकथ्रू है।
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन को उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों की कनेक्टिविटी के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। यह रेल मार्ग ऋषिकेश से शुरू होकर टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों से गुजरते हुए कर्णप्रयाग तक पहुंचेगा। कठिन हिमालयी भूगोल के कारण परियोजना में बड़ी संख्या में सुरंगों और पुलों का निर्माण किया जा रहा है। परियोजना का उद्देश्य सिर्फ यात्रियों को सुविधा देना नहीं, बल्कि पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था और आपातकालीन कनेक्टिविटी को भी मजबूत करना है।
इस परियोजना की खासियत इसका बड़ा हिस्सा सुरंगों के जरिए बनाया जाना है। मौजूदा निर्माण प्रगति के अनुसार मुख्य सुरंगों और एस्केप सुरंगों का बड़ा हिस्सा तैयार हो चुका है। हालिया एस्केप टनल-1 का ब्रेकथ्रू इस लिहाज से महत्वपूर्ण है क्योंकि 10.847 किलोमीटर लंबी यह सुरंग कठिन हिमालयी चट्टानों और भूगर्भीय परिस्थितियों से होकर गुजरती है। परियोजना में कुल 28 सुरंगों का प्रावधान है और निर्माण एजेंसी RVNL लगातार नए चरण पूरे कर रही है।
दूसरी तरफ दिल्ली-NCR से उत्तराखंड की कनेक्टिविटी को तेज करने के लिए Namo Bharat नेटवर्क के विस्तार की योजना भी चर्चा में है। प्रस्तावित Modipuram-ऋषिकेश कॉरिडोर करीब 150 किलोमीटर लंबा बताया गया है और इसके जरिए मेरठ से आगे ऋषिकेश तक तेज क्षेत्रीय रेल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने की योजना है। रिपोर्टों के मुताबिक इस कॉरिडोर को 160 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार के लिए डिजाइन किए जाने का प्रस्ताव है। हालांकि इस विस्तार को मौजूदा Namo Bharat नेटवर्क की तरह पूरी तरह चालू परियोजना मानना जल्दबाजी होगी; इसकी मंजूरी और निर्माण के चरण अलग हैं।
अगर दोनों कनेक्टिविटी परियोजनाएं अपने निर्धारित लक्ष्य के अनुसार आगे बढ़ती हैं, तो दिल्ली-NCR से उत्तराखंड के प्रवेश द्वार तक पहुंचने में लगने वाला समय काफी कम हो सकता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक Namo Bharat और ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल कनेक्शन के संयोजन से NCR से हिमालयी क्षेत्र तक यात्रा करीब 5 से 6 घंटे में पूरी होने की संभावना जताई गई है। अभी सड़क मार्ग से पहाड़ों की ओर जाने में ट्रैफिक, मौसम और सड़क की स्थिति के कारण यात्रा समय काफी बदल सकता है।
चारधाम यात्रा के लिहाज से भी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कर्णप्रयाग आगे प्रस्तावित चारधाम रेल नेटवर्क के लिए एक अहम फीडर प्वाइंट की भूमिका निभाएगा। भविष्य में कर्णप्रयाग से केदारनाथ और बद्रीनाथ की दिशा में प्रस्तावित रेल कनेक्टिविटी से इस पूरे क्षेत्र में परिवहन का ढांचा और मजबूत हो सकता है। हालांकि इन आगे के मार्गों की स्थिति ऋषिकेश-कर्णप्रयाग लाइन से अलग है और उन्हें अभी मौजूदा चालू रेल कनेक्शन नहीं माना जा सकता।
इस परियोजना का फायदा सिर्फ तीर्थयात्रियों को नहीं मिलेगा। उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में रहने वाले लोगों को बेहतर आवाजाही, पर्यटन कारोबार को बढ़ावा और स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है। साथ ही सड़क मार्ग पर वाहनों का दबाव कम होने और यात्रा के अधिक व्यवस्थित विकल्प उपलब्ध होने की उम्मीद है। हिमालयी क्षेत्र में किसी भी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के साथ पर्यावरण और भूगर्भीय सुरक्षा भी अहम मुद्दे हैं, इसलिए निर्माण की गति के साथ इन पहलुओं पर भी ध्यान देना जरूरी होगा।
कुल मिलाकर, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन और प्रस्तावित Namo Bharat विस्तार उत्तराखंड की कनेक्टिविटी का चेहरा बदल सकते हैं। अभी दोनों परियोजनाओं के अलग-अलग निर्माण और मंजूरी चरण हैं, लेकिन इनके पूरा होने पर दिल्ली-NCR से ऋषिकेश और आगे कर्णप्रयाग तक यात्रा अधिक तेज और सुविधाजनक हो सकती है। चारधाम यात्रा के लिए यह बदलाव आने वाले वर्षों में खासा महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
