उत्तर प्रदेश की राजनीति में उस समय भावनात्मक माहौल बन गया जब संजय निषाद गोरखपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मंच पर ही फूट-फूटकर रो पड़े। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो चुकी हैं। गोरखपुर के दिग्विजयनाथ पार्क में आयोजित इस बड़ी सभा में हजारों कार्यकर्ताओं की मौजूदगी के बीच उनका यह भावुक रूप चर्चा का विषय बन गया।
अपने संबोधन के दौरान संजय निषाद ने निषाद समाज के साथ हुए कथित अन्याय का जिक्र करते हुए कहा कि पिछली सरकारों ने उनके समाज को केवल वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया और उनके अधिकारों को छीन लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि “हमारे समाज के लोगों को ठगा गया, लूटा गया और उन्हें विकास से दूर रखा गया।” इतना कहते-कहते वे भावुक हो गए और खुद को संभाल नहीं पाए।
उन्होंने मंच से यह भी कहा कि उनके समाज की बहन-बेटियों की इज्जत के साथ खिलवाड़ हुआ और बच्चों को शिक्षा व अवसरों से वंचित रखा गया। इस दौरान उन्होंने अपने समर्थकों से अपील की कि वे ठगों और बेईमानों का साथ छोड़कर अपनी राजनीतिक ताकत को मजबूत करें। उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि यदि समाज खुद संगठित होगा, तभी उसका भविष्य सुरक्षित हो सकेगा।
अपने भाषण में संजय निषाद ने मौजूदा सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने निषाद समाज की समस्याओं को समझा और उनकी आवाज को सदन तक पहुंचाया। वहीं, विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि पूर्व की सरकारों ने सिर्फ वादे किए, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं किया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संजय निषाद का यह भावुक भाषण सिर्फ एक व्यक्तिगत प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक सोची-समझी चुनावी रणनीति भी हो सकती है। निषाद समाज का उत्तर प्रदेश की कई सीटों पर प्रभाव है और ऐसे में इस तरह की भावनात्मक अपील चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे सियासी बहस और तेज हो गई है। एक तरफ जहां समर्थक इसे समाज के दर्द की सच्ची अभिव्यक्ति बता रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक ड्रामा करार दे रहा है। आने वाले चुनावों में यह भावनात्मक संदेश कितना असर डालता है, यह देखना दिलचस्प होगा।
