
बिहार के मुजफ्फरपुर में AI और डीपफेक से होटल कारोबारी को लगाया 97 लाख का चूना
बिहार के मुजफ्फरपुर से साइबर अपराध का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक होटल कारोबारी को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल कर हनी ट्रैप में फंसाया गया और उससे करीब 97 लाख रुपये की ठगी कर ली गई। पुलिस के अनुसार अपराधियों ने पहले कारोबारी से सोशल मीडिया के माध्यम से संपर्क किया और एक महिला की फर्जी पहचान बनाकर उससे दोस्ती की। बातचीत का सिलसिला धीरे-धीरे बढ़ता गया और आरोपी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर ऐसे वीडियो और तस्वीरें तैयार करते रहे, जिनसे पीड़ित को यह विश्वास हो गया कि वह वास्तव में उसी महिला से बात कर रहा है। जब कारोबारी पूरी तरह उनके जाल में फंस गया, तब आरोपियों ने उसे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया और अलग-अलग बहानों से बड़ी रकम अपने खातों में ट्रांसफर करा ली।
जांच में सामने आया कि ठगों ने डीपफेक तकनीक की मदद से महिला के चेहरे और आवाज का इस्तेमाल करते हुए बेहद वास्तविक दिखने वाले वीडियो कॉल तैयार किए। इन वीडियो कॉल के जरिए पीड़ित का भरोसा जीतने के बाद अपराधियों ने निजी बातचीत और कथित आपत्तिजनक सामग्री का डर दिखाकर उसे लगातार धमकाया। शुरुआत में छोटी-छोटी रकम मांगी गई, लेकिन बाद में ब्लैकमेलिंग का दबाव बढ़ाते हुए लाखों रुपये की मांग की जाने लगी। बदनामी के डर से होटल कारोबारी कई बार अलग-अलग खातों में पैसे भेजता रहा और कुल मिलाकर लगभग 97 लाख रुपये आरोपियों तक पहुंच गए।
जब लगातार पैसों की मांग खत्म नहीं हुई और पीड़ित को अपने साथ धोखाधड़ी होने का एहसास हुआ, तब उसने पुलिस से संपर्क किया। शिकायत मिलने के बाद साइबर थाना और स्थानीय पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, डिजिटल लेनदेन और आईपी एड्रेस सहित कई तकनीकी साक्ष्यों को खंगालना शुरू कर दिया है। पुलिस का कहना है कि इस गिरोह के तार अन्य राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं और मामले में साइबर विशेषज्ञों की सहायता लेकर आरोपियों की पहचान की जा रही है। साथ ही जिन बैंक खातों में रकम भेजी गई, उनकी भी विस्तृत जांच की जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि AI और डीपफेक तकनीक के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल ने साइबर अपराध के तौर-तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है। पहले जहां अपराधी केवल फर्जी कॉल या मैसेज के जरिए लोगों को निशाना बनाते थे, वहीं अब वास्तविक जैसे दिखने वाले वीडियो और आवाज तैयार कर लोगों का विश्वास जीतना आसान हो गया है। यही कारण है कि ऐसे मामलों में सामान्य व्यक्ति के लिए असली और नकली के बीच अंतर करना बेहद मुश्किल होता जा रहा है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से व्यक्तिगत संबंध बनाने से बचें, वीडियो कॉल या डिजिटल पहचान पर बिना पुष्टि किए भरोसा न करें और किसी भी तरह की ब्लैकमेलिंग होने पर तुरंत पुलिस और साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति सोशल मीडिया या मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से दोस्ती कर निजी जानकारी या पैसे की मांग करता है, तो सतर्क रहें। किसी भी तरह की धमकी या ब्लैकमेलिंग के दबाव में आकर पैसे भेजने के बजाय तुरंत इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दें। अधिकारियों का मानना है कि AI आधारित साइबर अपराध आने वाले समय में और बढ़ सकते हैं, इसलिए डिजिटल जागरूकता और सतर्कता ही इस तरह की ठगी से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है। मुजफ्फरपुर की यह घटना एक बार फिर इस बात की चेतावनी है कि आधुनिक तकनीक जितनी सुविधाजनक है, उसका दुरुपयोग उतना ही खतरनाक भी साबित हो सकता है।


