तकनीक केवल सुविधाओं का माध्यम ही नहीं, बल्कि कई बार बिछड़े रिश्तों को जोड़ने का जरिया भी बन जाती है। इसका सबसे भावुक उदाहरण भारत में जन्मे सरू ब्रियरली (Saroo Brierley) की कहानी है, जिन्होंने बचपन में अपने परिवार से बिछड़ने के करीब 25 साल बाद Google Earth की मदद से अपनी मां और अपने गांव को खोज निकाला। उनकी यह वास्तविक कहानी पूरी दुनिया में प्रेरणा का स्रोत बनी और इसी पर आधारित हॉलीवुड फिल्म ‘लायन’ (Lion) भी बनाई गई, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी सराहना मिली।
सरू ब्रियरली का जन्म मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के गणेश तलई क्षेत्र में हुआ था। जब वह लगभग 5-6 वर्ष के थे, तब एक दिन अपने बड़े भाई के साथ रेलवे स्टेशन पहुंचे। इंतजार करते-करते वह एक खाली ट्रेन में चढ़ गए और वहीं सो गए। जब उनकी आंख खुली तो ट्रेन सैकड़ों किलोमीटर दूर कोलकाता पहुंच चुकी थी। भाषा, स्थान और परिवार की कोई जानकारी न होने के कारण वह अपने घर वापस नहीं लौट सके। कई दिनों तक सड़कों पर भटकने के बाद उन्हें एक अनाथालय भेजा गया, जहां से बाद में एक ऑस्ट्रेलियाई दंपति ने उन्हें गोद ले लिया। इसके बाद उनका पालन-पोषण ऑस्ट्रेलिया में हुआ, लेकिन बचपन की यादें उनके मन से कभी नहीं मिट सकीं।
समय बीतने के साथ सरू ने अपने अतीत की तलाश शुरू की। उन्होंने बचपन की धुंधली यादों, रेलवे लाइन, स्टेशन, पुल और आसपास के इलाकों को याद करते हुए Google Earth पर वर्षों तक हजारों किलोमीटर के रेलवे मार्गों का अध्ययन किया। करीब तीन साल तक लगातार खोज करने के बाद उन्हें मध्य प्रदेश का खंडवा क्षेत्र अपनी यादों से मेल खाता दिखाई दिया। इसके बाद उन्होंने स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया की मदद ली और आखिरकार 2012 में अपने गांव पहुंचकर अपनी मां और परिवार से मुलाकात की। करीब 25 वर्षों बाद हुआ यह मिलन बेहद भावुक था और इसकी तस्वीरें पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गईं।
बाद में सरू ब्रियरली ने अपने जीवन पर आधारित आत्मकथा ‘A Long Way Home’ लिखी, जिसमें उन्होंने अपने संघर्ष, बिछड़ने और परिवार तक पहुंचने की पूरी कहानी साझा की। इसी पुस्तक पर आधारित वर्ष 2016 में हॉलीवुड फिल्म ‘Lion’ बनाई गई, जिसमें अभिनेता देव पटेल ने वयस्क सरू और सनी पवार ने उनके बचपन का किरदार निभाया। फिल्म को ऑस्कर सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों के लिए नामांकन मिला और इसने दुनिया भर के दर्शकों को भावुक कर दिया।
आज सरू ब्रियरली की कहानी केवल एक व्यक्ति के अपने परिवार तक पहुंचने की दास्तान नहीं मानी जाती, बल्कि यह उम्मीद, धैर्य और आधुनिक तकनीक की शक्ति का प्रतीक बन चुकी है। उनकी यात्रा यह संदेश देती है कि यदि संकल्प मजबूत हो तो वर्षों पुरानी दूरियां भी मिट सकती हैं। Google Earth जैसी तकनीक ने जिस तरह एक बिछड़े बेटे को उसकी मां से मिलाया, वह आज भी दुनिया की सबसे प्रेरणादायक वास्तविक कहानियों में गिनी जाती है।
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