पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब ने अमेरिका और ईरान के बीच संभावित सैन्य टकराव को लेकर अपनी चिंता खुलकर जाहिर की है। रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत कर ईरान पर बड़े पैमाने पर नए हमलों की संभावित योजना को लेकर चिंता व्यक्त की। बताया जा रहा है कि इस बातचीत में MBS ने क्षेत्रीय स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा और खाड़ी देशों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का मुद्दा उठाया।
सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन ईरान के खिलाफ आगे की सैन्य कार्रवाई के विकल्पों पर विचार कर रहा था। हालांकि अंतिम निर्णय नहीं लिया गया था, लेकिन सैन्य तैयारियों और बढ़ते तनाव ने खाड़ी देशों की चिंताएं बढ़ा दी थीं। इसी पृष्ठभूमि में सऊदी नेतृत्व ने अमेरिका से संयम बरतने और हालात को और अधिक न बिगाड़ने की अपील की। रिपोर्टों में कहा गया है कि सऊदी अरब को आशंका है कि यदि संघर्ष बढ़ता है तो ईरान की ओर से पूरे क्षेत्र में जवाबी कार्रवाई हो सकती है, जिसका असर तेल प्रतिष्ठानों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर भी पड़ सकता है।
पश्चिम एशिया में किसी भी बड़े सैन्य संघर्ष का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है और यहां तनाव बढ़ने से वैश्विक तेल आपूर्ति तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हो सकता है। यही वजह है कि सऊदी अरब समेत कई क्षेत्रीय देश लगातार तनाव कम करने और कूटनीतिक समाधान की वकालत कर रहे हैं। हाल के दिनों में विभिन्न देशों ने भी सभी पक्षों से संयम बरतने और संवाद का रास्ता अपनाने की अपील की है।
रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी अरब ने इस बात पर भी जोर दिया कि क्षेत्र में व्यापक युद्ध की स्थिति बनने से खाड़ी देशों की सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में किसी भी बड़े संघर्ष का सीधा प्रभाव कच्चे तेल की कीमतों, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय निवेश पर पड़ सकता है। यही कारण है कि सऊदी अरब इस समय कूटनीतिक प्रयासों के जरिए तनाव कम करने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाता दिखाई दे रहा है।
इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बाद में संकेत दिए कि संभावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल रोका जा सकता है, यदि कूटनीतिक बातचीत आगे बढ़ती है और तनाव कम करने की दिशा में ठोस प्रगति होती है। हालांकि क्षेत्र की स्थिति अब भी बेहद संवेदनशील बनी हुई है और पूरी दुनिया की नजर अमेरिका, ईरान तथा खाड़ी देशों के अगले कदमों पर टिकी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कूटनीति और सैन्य रणनीति के बीच संतुलन ही पश्चिम एशिया की दिशा तय करेगा।
