अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते की दिशा में बढ़ती सकारात्मक खबरों का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। मंगलवार को घरेलू बाजार ने लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में मजबूती दिखाई और निवेशकों ने जमकर खरीदारी की। शुरुआती कारोबार से ही सेंसेक्स और निफ्टी हरे निशान में कारोबार करते नजर आए। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने की उम्मीद ने वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है, जिसका सीधा लाभ भारतीय बाजार को मिला।
बाजार में इस तेजी की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट मानी जा रही है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में नरमी देश की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत मानी जाती है। अमेरिका-ईरान समझौते की खबरों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों को उम्मीद जगी कि भारत का आयात बिल कम होगा और महंगाई पर दबाव घटेगा।
पिछले कारोबारी सत्र में भी भारतीय शेयर बाजार ने शानदार प्रदर्शन किया था। सेंसेक्स 700 से अधिक अंकों की छलांग लगाकर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 23,800 के ऊपर पहुंच गया था। विदेशी निवेशकों की खरीदारी और वैश्विक बाजारों से मिले मजबूत संकेतों ने बाजार को अतिरिक्त समर्थन दिया। विश्लेषकों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में शांति प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो भारतीय इक्विटी बाजार में और मजबूती देखने को मिल सकती है।
मंगलवार के कारोबार में आईटी, बैंकिंग, ऑटो और वित्तीय क्षेत्र के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में तेजी के कारण बाजार सूचकांकों को मजबूती मिली। निवेशकों का मानना है कि तेल की कीमतों में कमी से परिवहन, विमानन और विनिर्माण क्षेत्र की कंपनियों को भी राहत मिलेगी, जिससे उनके मुनाफे पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
वैश्विक बाजारों में भी सकारात्मक माहौल बना हुआ है। अमेरिका और यूरोप के प्रमुख शेयर सूचकांकों में तेजी दर्ज की गई है। वॉल स्ट्रीट में रिकॉर्ड ऊंचाई देखने को मिली, जबकि एशियाई बाजारों में भी खरीदारी का रुझान बना हुआ है। निवेशक यह मानकर चल रहे हैं कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से खुल जाता है और क्षेत्रीय तनाव कम होता है, तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा बाजार में स्थिरता लौट सकती है।
हालांकि बाजार विशेषज्ञ निवेशकों को सतर्क रहने की भी सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि शांति समझौते की घोषणा और उसके पूर्ण क्रियान्वयन के बीच अभी कई कूटनीतिक और रणनीतिक चुनौतियां मौजूद हैं। यदि किसी कारणवश बातचीत में रुकावट आती है या समझौते के कुछ हिस्सों पर विवाद पैदा होता है, तो बाजार में फिर से उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
फिलहाल बाजार का रुख सकारात्मक बना हुआ है और निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान वार्ता, कच्चे तेल की कीमतों तथा विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर टिकी हुई है। यदि मौजूदा परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं, तो आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार नए स्तरों की ओर बढ़ सकता है और निवेशकों का भरोसा और मजबूत हो सकता है।
