Site icon Prsd News

सर्बिया में 14 साल के राजनीतिक दबदबे को झटका, छात्र आंदोलन के सामने अलेक्जेंडर वुचिच ने मानी हार; जानें 10 बड़ी बातें

serbia student protest 2 1792776159

यूरोपीय देश सर्बिया की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। लंबे समय से देश की राजनीति पर प्रभाव रखने वाले अलेक्जेंडर वुचिच ने संसदीय चुनाव में छात्र आंदोलन से जुड़े उम्मीदवारों के हाथों हार स्वीकार कर ली है। 25 अक्टूबर को हुए इस चुनाव के शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, छात्र समर्थित ‘स्टूडेंट लिस्ट’ संसद में सबसे बड़े समूह के रूप में उभरती दिखाई दे रही है। इस घटनाक्रम को सर्बिया की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।

अलेक्जेंडर वुचिच और उनकी सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी का देश की सत्ता पर एक दशक से अधिक समय से दबदबा रहा है। वुचिच 2014 में प्रधानमंत्री बने थे और 2017 में राष्ट्रपति पद संभाला था। हाल में उन्होंने राष्ट्रपति पद छोड़कर समय से पहले कराए गए संसदीय चुनाव में प्रधानमंत्री पद के लिए राजनीतिक वापसी की कोशिश की थी। हालांकि, शुरुआती चुनावी अनुमानों ने उनके राजनीतिक खेमे को बड़ा झटका दिया है।

वुचिच ने चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वीकार किया कि उनकी पार्टी चुनाव हार गई है। उनके शुरुआती अनुमान के अनुसार, छात्र समर्थित सूची को संसद की 250 सीटों में से लगभग 135 से 140 सीटें मिल सकती हैं, जबकि उनकी पार्टी को करीब 105 सीटें मिलने की संभावना है। ये आंकड़े शुरुआती अनुमानों पर आधारित हैं और अंतिम आधिकारिक परिणामों से इनमें बदलाव संभव है।

इस राजनीतिक बदलाव के पीछे लगभग दो साल से चल रहा छात्र आंदोलन एक अहम वजह माना जा रहा है। नवंबर 2024 में नोवी साद शहर के रेलवे स्टेशन की छतरी ढहने से 16 लोगों की मौत हो गई थी। इस हादसे के बाद निर्माण कार्यों में कथित भ्रष्टाचार, सुरक्षा मानकों और जवाबदेही को लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू हुए। छात्रों ने घटना की पारदर्शी जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।

समय के साथ यह आंदोलन केवल हादसे की जांच तक सीमित नहीं रहा। प्रदर्शनकारियों ने भ्रष्टाचार पर रोक लगाने, सरकारी संस्थानों में जवाबदेही बढ़ाने और राजनीतिक व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई। विश्वविद्यालयों के छात्रों के साथ शिक्षकों, किसानों और समाज के अन्य वर्गों के लोगों ने भी कई जगहों पर आंदोलन का समर्थन किया। इस तरह छात्र विरोध प्रदर्शन सरकार के सामने एक बड़े राजनीतिक चुनौत

Exit mobile version