
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर धर्म और राजनीति को लेकर चर्चा तेज हो गई है। ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इन दोनों दलों में उन्हें “इस्तेमाल करने की चतुराई नहीं है”, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) चाहे तो उनका उपयोग कर सकती है। उनके इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है और अलग-अलग राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।
दरअसल, लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने मीडिया से बातचीत में यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि वह किसी राजनीतिक दल के एजेंडे पर काम करने वाले व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि सनातन धर्म और गौ-रक्षा जैसे मुद्दों को लेकर समाज में जागरूकता फैलाने का अभियान चला रहे हैं। उनका कहना था कि अगर कोई राजनीतिक दल इन मुद्दों पर गंभीरता से काम करना चाहता है तो उसे उनका समर्थन मिल सकता है, लेकिन किसी भी दल के लिए वे प्रचार का साधन नहीं बनेंगे।
इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस जैसी पार्टियों में उन्हें इस्तेमाल करने की रणनीतिक समझ नहीं है। उनके अनुसार भाजपा यदि वास्तव में धर्म और संस्कृति के मुद्दों पर काम करना चाहती है तो वह उनका सहयोग ले सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी पार्टी का समर्थन करना नहीं बल्कि समाज में धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करना है।
शंकराचार्य इन दिनों गो-रक्षा और सनातन धर्म से जुड़े मुद्दों को लेकर सक्रिय अभियान चला रहे हैं। हाल ही में उन्होंने “गो प्रतिष्ठा जनजागरण अभियान” और “धर्मयुद्ध” जैसे कार्यक्रमों का ऐलान किया है, जिसके तहत देशभर में धार्मिक जागरूकता फैलाने और गौ-संरक्षण के लिए आंदोलन चलाने की योजना है। इस अभियान के तहत कई धार्मिक कार्यक्रम, यात्राएं और सभाएं आयोजित की जा रही हैं।
हाल के दिनों में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद कई बार राजनीतिक मुद्दों पर बयान दे चुके हैं। उन्होंने पहले भी कहा था कि किसी एक राजनीतिक दल का समर्थन करने से ही कोई व्यक्ति सच्चा हिंदू नहीं हो जाता और धर्म को केवल राजनीति के नजरिए से देखना सही नहीं है। उनके अनुसार धर्म समाज को जोड़ने का माध्यम होना चाहिए, न कि राजनीतिक लाभ का साधन।
विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों के माहौल में धर्म से जुड़े मुद्दों पर इस तरह के बयान राजनीतिक बहस को और तेज कर सकते हैं। शंकराचार्य का यह बयान भी उसी कड़ी में देखा जा रहा है, जहां धार्मिक हस्तियां सार्वजनिक मंचों से राजनीतिक दलों और उनकी नीतियों पर खुलकर अपनी राय व्यक्त कर रही हैं।


