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ममता बनर्जी के साथ खड़े हुए शत्रुघ्न सिन्हा, टीएमसी में बगावत की अटकलों पर लगाया विराम

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पश्चिम बंगाल की राजनीति इन दिनों भारी उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान और बगावत की खबरों के बीच पार्टी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी हाल में ममता बनर्जी का साथ नहीं छोड़ेंगे। उनके इस बयान को टीएमसी के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि पिछले कुछ दिनों से उनके भी बागी खेमे में शामिल होने की चर्चाएं तेज थीं।

दिल्ली में मीडिया से बातचीत करते हुए शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि जब वह अपने राजनीतिक जीवन के कठिन दौर से गुजर रहे थे, तब ममता बनर्जी ने उनका साथ दिया था। उन्होंने कहा कि आज जब पार्टी और ममता बनर्जी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना कर रही हैं, तब उनका नैतिक कर्तव्य बनता है कि वह उनके साथ मजबूती से खड़े रहें। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह टीएमसी और ममता बनर्जी को छोड़कर कहीं नहीं जाने वाले हैं।

दरअसल, टीएमसी इस समय अपने सबसे बड़े राजनीतिक संकटों में से एक का सामना कर रही है। पार्टी के कई सांसदों और नेताओं के असंतोष की खबरें सामने आई हैं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि बागी नेताओं को लोकसभा में टीएमसी के 28 सांसदों में से 19 सांसदों का समर्थन प्राप्त होने का दावा है। यदि ऐसा होता है तो यह पार्टी के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है और इसकी तुलना शिवसेना तथा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में हुई टूट से की जा रही है।

पार्टी के भीतर असंतोष की एक बड़ी वजह अभिषेक बनर्जी को लेकर भी बताई जा रही है। टीएमसी सांसद और वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी ने सार्वजनिक रूप से नाराजगी जाहिर करते हुए यहां तक कह दिया कि ममता बनर्जी को उनके और अभिषेक बनर्जी के बीच फैसला करना होगा। उन्होंने अभिषेक के नेतृत्व और कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं, जिससे पार्टी के अंदर चल रहे मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।

इसी बीच अभिषेक बनर्जी भी कानूनी और राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। कथित हस्ताक्षर जालसाजी मामले में उन्हें पूछताछ के लिए जांच एजेंसियों के सामने पेश होना पड़ा, हालांकि अदालत से उन्हें अंतरिम राहत भी मिली है। इस घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर चल रहे विवाद को और अधिक चर्चा में ला दिया है।

टीएमसी नेतृत्व लगातार पार्टी को एकजुट रखने की कोशिश कर रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता कीर्ति आजाद ने विश्वास जताया है कि ममता बनर्जी संगठन में फिर से सामंजस्य स्थापित करने में सफल होंगी। वहीं, कांग्रेस के साथ बढ़ती नजदीकियों और संभावित राजनीतिक तालमेल की चर्चाओं ने भी पश्चिम बंगाल की राजनीति को नई दिशा दे दी है। हालांकि कांग्रेस नेतृत्व ने टीएमसी के साथ किसी विलय की अटकलों को निराधार बताया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे समय में शत्रुघ्न सिन्हा का खुलकर ममता बनर्जी के समर्थन में आना टीएमसी के लिए मनोबल बढ़ाने वाला कदम है। उनकी लोकप्रियता और राष्ट्रीय पहचान को देखते हुए यह संदेश पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच सकारात्मक असर डाल सकता है। हालांकि टीएमसी के भीतर जारी असंतोष और नेताओं के इस्तीफों ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में कई बड़े घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।

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