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शिवपुरी में ‘थार कांड’ पर बवाल: विधायक के बेटे पर कार्रवाई से भड़का विवाद, IPS अफसर को दी खुली धमकी

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में एक सड़क हादसे ने अब बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। मामला उस वक्त तूल पकड़ गया जब एक बीजेपी विधायक के बेटे पर तेज रफ्तार थार गाड़ी से लोगों को टक्कर मारने का आरोप लगा और पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। इस पूरे घटनाक्रम में प्रशासन और राजनीति आमने-सामने आ गए हैं, जिससे कानून व्यवस्था और सत्ता के टकराव पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

दरअसल, करैरा क्षेत्र में हुए इस हादसे में विधायक के बेटे पर आरोप है कि उसने अपनी SUV (थार) से एक के बाद एक कई लोगों को टक्कर मार दी, जिसमें करीब 5 लोग घायल हो गए। पीड़ितों के अनुसार, हादसे के बाद भी उन्हें धमकाने की बात सामने आई है, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया।

पुलिस ने इस मामले में आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू की और पूछताछ के लिए थाने बुलाया। जांच के दौरान वाहन से नियमों का उल्लंघन—जैसे काली फिल्म और अन्य गड़बड़ियां—भी सामने आईं, जिसके तहत चालान की कार्रवाई की गई।

लेकिन असली विवाद तब शुरू हुआ जब विधायक प्रीतम लोधी का एक वीडियो सामने आया, जिसमें वह करैरा के एसडीओपी और 2022 बैच के आईपीएस अधिकारी आयुष जाखड़ को खुलेआम धमकी देते नजर आए। वीडियो में उन्होंने कथित तौर पर कहा कि “क्या करैरा तुम्हारे डैडी का है?” और यहां तक कि अपने बेटे को फिर से क्षेत्र में आने और चुनाव लड़ने की बात भी कही।

इस बयान के बाद मामला सिर्फ एक सड़क दुर्घटना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह राजनीतिक हस्तक्षेप और पुलिस पर दबाव के आरोपों में बदल गया। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधा है और इसे सत्ता के दुरुपयोग का उदाहरण बताया है।

वहीं दूसरी ओर, आईपीएस अधिकारी आयुष जाखड़ की छवि एक सख्त और ईमानदार अधिकारी के रूप में सामने आई है। बताया जाता है कि वे पहले डॉक्टर रह चुके हैं और 2022 में यूपीएससी पास कर आईपीएस बने। इस मामले में उनकी कार्रवाई को लेकर प्रशासनिक सख्ती की चर्चा हो रही है।

पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या कानून सभी के लिए समान है या फिर राजनीतिक प्रभाव के चलते जांच प्रभावित हो सकती है। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और प्रशासन मामले को लेकर सतर्क नजर आ रहा है।

कुल मिलाकर, शिवपुरी का यह मामला केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम में राजनीतिक दबाव और प्रशासनिक स्वतंत्रता के बीच टकराव का बड़ा उदाहरण बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई होती है या यह विवाद और गहराता है।

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