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Flydubai Flight में हमले की पूरी कहानी, कैप्टन Smit Machchhar ने बताया कैसे बचीं 174 जानें; खोली थी कॉकपिट की दरवाजा दो बार

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फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में हुए खौफनाक कॉकपिट हमले के बाद अब इस घटना की पूरी कहानी धीरे-धीरे सामने आ रही है। भारतीय कैप्टन Smit Machchhar ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत के दौरान बताया कि विमान के कॉकपिट में आखिर उस वक्त क्या हुआ था, जब उनके सह-पायलट ने उन पर हमला कर दिया था। इस दौरान विमान तेजी से नीचे जा रहा था और उसमें सवार 174 लोगों की जान खतरे में पड़ गई थी। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन मच्छर ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश जारी रखी, जिससे यात्रियों और क्रू को अंदर पहुंचकर स्थिति संभालने का मौका मिला।

कैप्टन मच्छर के मुताबिक, फ्लाइट सामान्य तरीके से आगे बढ़ रही थी। इसी दौरान उनके ओमानी सह-पायलट ने कहा कि वह प्रार्थना करना चाहता है। कैप्टन ने बताया कि उन्हें यह बात असामान्य नहीं लगी और उन्होंने सम्मान के कारण पीछे मुड़कर देखने की कोशिश नहीं की। कुछ मिनट बाद अचानक उनके सिर के पीछे जोरदार वार हुआ। शुरुआत में उन्हें समझ नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है, लेकिन लगातार दूसरा हमला होने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि सह-पायलट ही उन पर हमला कर रहा है।

हमले के दौरान कैप्टन मच्छर की आंखों की रोशनी धुंधली हो गई थी और वह बुरी तरह घायल हो चुके थे। इसी बीच विमान तेजी से नीचे जाने लगा। उन्हें महसूस हुआ कि अगर उन्होंने तुरंत कुछ नहीं किया तो विमान में सवार सभी लोगों की जान जा सकती है। घायल अवस्था में उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश की। वह पहली बार दरवाजा खोलने में कामयाब हुए, लेकिन सह-पायलट ने उसे दोबारा बंद कर दिया और कैप्टन जमीन पर गिर पड़े।

इसके बाद कैप्टन मच्छर ने एक और कोशिश करने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि उस समय उन्हें लगा कि उनके पास शायद आखिरी मौका है। बेहद कमजोर और घायल होने के बावजूद उन्होंने अपनी पूरी ताकत लगाकर कॉकपिट का दरवाजा फिर खोल दिया। इस बार बाहर मौजूद लोगों को अंदर आने का रास्ता मिल गया। यात्रियों और क्रू के सदस्यों ने कॉकपिट में प्रवेश किया और हमलावर सह-पायलट को काबू करने में मदद की। यही वह पल था जिसने पूरी स्थिति को बदल दिया।

इस घटना के दौरान विमान अचानक हजारों फीट नीचे चला गया था। फ्लाइट दुबई से तेल अवीव जा रही थी और उसमें 174 लोग सवार थे। कॉकपिट में हुए संघर्ष के बाद विमान को सऊदी अरब के तबुक की ओर डायवर्ट किया गया, जहां उसकी सुरक्षित लैंडिंग कराई गई। यात्रियों और रिजर्व क्रू के सदस्यों ने भी विमान को सुरक्षित जमीन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस पूरे घटनाक्रम में कैप्टन Smit Machchhar की भूमिका सबसे अहम रही। वह खुद गंभीर रूप से घायल थे, लेकिन उनका ध्यान लगातार विमान में मौजूद लोगों की सुरक्षा पर था। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत के दौरान भी उन्होंने बताया था कि जब उन्हें पता चला कि विमान नीचे जा रहा है, तब उन्होंने किसी भी तरह कॉकपिट का दरवाजा खोलने का फैसला किया। उनका कहना था कि वह अपनी जिंदगी के लिए लड़ रहे थे, लेकिन साथ ही उन्हें पता था कि वह बाकी लोगों को मरने नहीं दे सकते।

कैप्टन मच्छर ने बताया कि वह पिछले 17 वर्षों से विमान उड़ा रहे हैं और करीब 11 वर्षों से कैप्टन हैं। उनका लंबा उड़ान अनुभव उस संकट के दौरान उनके काम आया। उन्होंने कहा कि वह विमान की स्थिति को आंखें बंद होने पर भी समझ सकते हैं। इसी अनुभव के आधार पर उन्हें पता चल गया था कि विमान गंभीर स्थिति में नीचे जा रहा है और तुरंत कार्रवाई करना जरूरी है।

घटना के बाद कैप्टन मच्छर को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। शुरुआती इलाज सऊदी अरब के तबुक में हुआ और बाद में उन्हें संयुक्त अरब अमीरात ले जाया गया। फिलहाल वह अबू धाबी में उपचार और रिकवरी कर रहे हैं। भारतीय दूतावास की ओर से भी बताया गया है कि उनकी हालत में सुधार हो रहा है।

इस घटना को लेकर जांच भी जारी है। संयुक्त अरब अमीरात के अधिकारियों ने बाद में इसे आतंकवादी हमले के प्रयास के तौर पर वर्णित किया और बताया कि सह-पायलट ने आपातकालीन इस्तेमाल वाले क्रैश एक्स से कैप्टन पर हमला किया था। सह-पायलट की पहचान ओमानी नागरिक Hamam al-Hammami के रूप में सामने आई है। हालांकि हमले की पूरी वजह, उसकी योजना और इसके पीछे किसी अन्य व्यक्ति या संगठन की भूमिका जैसे पहलुओं की जांच अभी जारी है।

कैप्टन Smit Machchhar की बहादुरी की भारत और विदेशों में लगातार सराहना हो रही है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने उनसे बातचीत के दौरान उन्हें इजरायल, भारत और पूरी दुनिया का हीरो बताया और उन्हें इजरायल के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया। इस पूरी घटना में कैप्टन मच्छर द्वारा घायल होने के बावजूद दो बार कॉकपिट का दरवाजा खोलना उस निर्णायक क्षण के तौर पर सामने आया है, जिसने यात्रियों और क्रू को अंदर पहुंचकर हमलावर को काबू करने का मौका दिया और एक बड़ी विमान दुर्घटना टल गई।

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