लंबे समय तक भूखे रहने के बाद सामान्य भोजन शुरू करना जितना आसान लगता है, वास्तव में उतना सुरक्षित नहीं होता। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के लंबे अनशन के बीच डॉक्टरों ने एक गंभीर चिकित्सीय स्थिति ‘रीफीडिंग सिंड्रोम’ (Refeeding Syndrome) को लेकर चेतावनी दी है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति कई दिनों या हफ्तों तक भोजन नहीं करता और फिर अचानक सामान्य मात्रा में खाना शुरू कर देता है, तो शरीर में खतरनाक जैविक बदलाव हो सकते हैं। इस दौरान शरीर ऊर्जा के लिए वसा और मांसपेशियों का उपयोग करने लगता है तथा पोटैशियम, फॉस्फेट और मैग्नीशियम जैसे आवश्यक इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन प्रभावित हो जाता है। ऐसे में भोजन दोबारा शुरू होने पर इंसुलिन का स्तर तेजी से बढ़ता है और ये खनिज रक्त से कोशिकाओं में चले जाते हैं, जिससे शरीर में इनकी कमी गंभीर रूप ले सकती है।
चिकित्सकों का कहना है कि रीफीडिंग सिंड्रोम के कारण दिल की धड़कन अनियमित हो सकती है, हार्ट फेल होने का खतरा बढ़ सकता है, सांस लेने में परेशानी, दौरे पड़ना, मांसपेशियों में कमजोरी और कई मामलों में मृत्यु तक हो सकती है। इसलिए लंबे उपवास के बाद मरीज को तुरंत सामान्य भोजन नहीं दिया जाता, बल्कि डॉक्टरों की निगरानी में धीरे-धीरे तरल पदार्थ, हल्का भोजन और आवश्यक विटामिन व इलेक्ट्रोलाइट्स दिए जाते हैं। विशेष रूप से पहले 3 से 7 दिन सबसे संवेदनशील माने जाते हैं और इस दौरान लगातार मेडिकल मॉनिटरिंग की आवश्यकता होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक उपवास करने वाले व्यक्ति का शरीर सामान्य चयापचय (मेटाबॉलिज्म) की स्थिति से काफी अलग अवस्था में पहुंच जाता है। इसलिए भोजन दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया भी एक चिकित्सीय उपचार की तरह होती है, जिसे बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं अपनाना चाहिए। यही कारण है कि लंबे अनशन पर रहे लोगों या गंभीर कुपोषण से उबर रहे मरीजों के लिए अस्पताल में नियंत्रित तरीके से भोजन शुरू कराया जाता है, ताकि रीफीडिंग सिंड्रोम जैसी संभावित जानलेवा स्थिति से बचा जा सके।
