मध्य पूर्व में जारी Iran–Israel conflict 2026 के बीच दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्ग Strait of Hormuz को लेकर स्थिति और अधिक उलझती जा रही है। ताजा घटनाक्रम में कई भारतीय तेल टैंकरों को अचानक अपना रास्ता बदलकर वापस लौटना पड़ा, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और बढ़ गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान की ओर से इस जलमार्ग को लेकर मिल रहे विरोधाभासी संकेतों ने जहाज मालिकों और तेल कंपनियों को असमंजस में डाल दिया है, जिसके चलते कई जहाजों ने आखिरी समय पर यू-टर्न ले लिया।
दरअसल, हाल ही में ईरान ने एक तरफ यह कहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य को वाणिज्यिक जहाजों के लिए खोला जा रहा है, वहीं दूसरी ओर उसकी सैन्य गतिविधियों और चेतावनियों ने स्थिति को बेहद अस्थिर बना दिया। कई रिपोर्ट्स में सामने आया है कि कुछ टैंकरों के पास पहुंचने पर ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड की नौकाओं ने फायरिंग भी की, जिसके बाद जहाजों को पीछे हटना पड़ा। इससे यह साफ हो गया कि जमीनी स्तर पर हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हैं।
इस पूरे घटनाक्रम की जड़ में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहा सैन्य टकराव है, जिसने इस क्षेत्र को वैश्विक ऊर्जा संकट के केंद्र में ला खड़ा किया है। विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य से सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के लगभग 20% तेल की आपूर्ति गुजरती है, लेकिन मौजूदा संघर्ष के चलते यहां से जहाजों की आवाजाही पर गंभीर असर पड़ा है।
हालांकि, कुछ समय के लिए युद्धविराम के चलते सीमित रूप से जहाजों को गुजरने की अनुमति दी गई थी, लेकिन अभी भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। कई देशों के टैंकर इस अवसर का फायदा उठाकर निकलने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि अन्य जहाज सुरक्षा कारणों से इंतजार या वापसी का रास्ता चुन रहे हैं।
भारत के लिए यह स्थिति खास तौर पर संवेदनशील है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से पूरा करता है। ऐसे में भारतीय टैंकरों का यू-टर्न लेना न सिर्फ सप्लाई चेन पर असर डाल सकता है, बल्कि भविष्य में तेल की कीमतों पर भी दबाव बढ़ा सकता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम नहीं होता और स्पष्ट समझौता नहीं होता, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य में यह अनिश्चितता बनी रहेगी। इससे न केवल वैश्विक व्यापार बल्कि आम उपभोक्ताओं पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव सीधे महंगाई से जुड़ा होता है।
कुल मिलाकर, होर्मुज जलडमरूमध्य इस समय वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा “चोक पॉइंट” बन गया है, जहां हर छोटे घटनाक्रम का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है।
