देश में लंबे समय से अदालतों में चल रही ‘तारीख पर तारीख’ की समस्या को खत्म करने के लिए Supreme Court of India ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई टालने (adjournment) के नियमों में बदलाव करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब बिना ठोस और असाधारण कारण के मामलों को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। कोर्ट द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, अब हर स्थगन की मांग के साथ स्पष्ट कारण बताना होगा और यह भी बताना होगा कि पहले कितनी बार तारीख ली जा चुकी है। साथ ही, विपक्षी पक्ष को भी इस पर आपत्ति जताने का अधिकार दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि केवल विशेष परिस्थितियों—जैसे गंभीर बीमारी, पारिवारिक शोक या अन्य वास्तविक कारण—में ही सुनवाई टालने की अनुमति दी जाएगी। इतना ही नहीं, नई व्यवस्था के तहत लगातार दो बार से ज्यादा स्थगन नहीं दिया जाएगा और कई मामलों में केवल एक बार ही तारीख लेने की अनुमति होगी। नियमित मामलों में तो अदालत ने लगभग स्थगन की अनुमति खत्म करने का संकेत दिया है।
कोर्ट का मानना है कि बार-बार सुनवाई टलने से न्याय प्रक्रिया धीमी होती है और आम लोगों को समय पर न्याय नहीं मिल पाता। देशभर की अदालतों में लंबित मामलों की बड़ी संख्या को देखते हुए यह फैसला न्याय व्यवस्था को तेज और प्रभावी बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
इस सख्ती के बाद अब वकीलों और पक्षकारों के लिए बिना मजबूत कारण के तारीख लेना आसान नहीं होगा, जिससे उम्मीद की जा रही है कि मामलों का निपटारा तेजी से होगा और ‘तारीख पर तारीख’ की समस्या में काफी हद तक कमी आएगी।
