पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच राजनीतिक सरगर्मियां अपने चरम पर पहुंच गई हैं। इसी कड़ी में भाजपा के वरिष्ठ नेता Suvendu Adhikari आज कोलकाता की भवानीपुर सीट से अपना नामांकन दाखिल करने जा रहे हैं। इस मौके को पार्टी ने हाई-प्रोफाइल शक्ति प्रदर्शन में बदलने की पूरी तैयारी कर ली है। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah खुद इस कार्यक्रम में शामिल होंगे और एक भव्य रोड शो के जरिए भाजपा अपनी ताकत दिखाने की कोशिश करेगी।
भवानीपुर सीट को तृणमूल कांग्रेस का गढ़ माना जाता है, जहां से मुख्यमंत्री Mamata Banerjee का मजबूत प्रभाव रहा है। ऐसे में भाजपा इस सीट को जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, अमित शाह का यह रोड शो हाजरा क्रॉसिंग से शुरू होकर विभिन्न इलाकों से गुजरते हुए ‘सर्वे बिल्डिंग’ तक जाएगा, जहां शुभेंदु अधिकारी अपना नामांकन दाखिल करेंगे। इस दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और समर्थकों के जुटने की उम्मीद है, जिससे चुनावी माहौल और गरमाने वाला है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ नामांकन भर नहीं, बल्कि भाजपा की ओर से तृणमूल कांग्रेस को सीधी चुनौती है। पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि वह मुख्यमंत्री के गढ़ में भी मजबूत मुकाबला देने के लिए तैयार है। अमित शाह की मौजूदगी इस बात को और मजबूत करती है कि भाजपा भवानीपुर सीट को बेहद गंभीरता से ले रही है और यहां जीत हासिल करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती।
इतना ही नहीं, खबरें यह भी हैं कि प्रधानमंत्री Narendra Modi भी आने वाले दिनों में भवानीपुर में चुनाव प्रचार कर सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो यह मुकाबला और भी हाई-वोल्टेज बन जाएगा। भाजपा जहां इस सीट पर पूरी ताकत लगा रही है, वहीं तृणमूल कांग्रेस भी अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए रणनीति तैयार कर रही है।
इस चुनाव में सभी दल जातीय और सामाजिक समीकरणों को साधने में जुटे हैं। जहां तृणमूल कांग्रेस अल्पसंख्यक और महिला वोट बैंक पर फोकस कर रही है, वहीं भाजपा उच्च जातियों और अन्य वर्गों को साधने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में भवानीपुर सीट न केवल एक चुनावी मुकाबला बन गई है, बल्कि यह पूरे राज्य की राजनीति का केंद्र भी बनती जा रही है।
कुल मिलाकर, शुभेंदु अधिकारी का यह नामांकन कार्यक्रम पश्चिम बंगाल चुनाव का सबसे अहम और चर्चित घटनाक्रम बन गया है। अब देखना यह होगा कि इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले में किसकी रणनीति भारी पड़ती है और जनता किसके पक्ष में फैसला सुनाती है।
