पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ बीजेपी नेता Suvendu Adhikari के निजी सहायक (PA) चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में जांच लगातार गहराती जा रही है। इस मामले में उत्तर प्रदेश के बलिया निवासी राज सिंह का नाम सामने आने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। पुलिस और जांच एजेंसियां अब इस केस के तार उत्तर प्रदेश के अयोध्या से लेकर बिहार के बक्सर तक जोड़कर देख रही हैं। वहीं दूसरी तरफ आरोपी राज सिंह की मां ने बेटे को निर्दोष बताते हुए पूरे मामले को साजिश करार दिया है।
राज सिंह की मां का कहना है कि उनका बेटा किसी भी तरह की आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं रहा है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि राज मेहनत मजदूरी करने वाला सीधा-सादा युवक है और उसे राजनीतिक दुश्मनी के कारण फंसाया जा रहा है। मां ने दावा किया कि घटना वाले दिन भी उनका बेटा घर से बाहर किसी निजी काम से गया था और हत्या से उसका कोई लेना-देना नहीं है। परिवार का कहना है कि पुलिस बिना पर्याप्त सबूत के उसे मुख्य आरोपी बताने की कोशिश कर रही है।
दरअसल, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद शुभेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी और निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने बंगाल की राजनीति में बड़ा तूफान खड़ा कर दिया। बीजेपी ने इसे राजनीतिक हिंसा का मामला बताते हुए राज्य सरकार पर निशाना साधा, जबकि विपक्ष ने निष्पक्ष जांच की मांग की। शुरुआती जांच में कुछ मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल्स और संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर राज सिंह का नाम सामने आया था।
जांच एजेंसियों के मुताबिक राज सिंह पिछले कुछ महीनों से अलग-अलग राज्यों में लगातार यात्रा कर रहा था। पुलिस को जानकारी मिली है कि वह बलिया से अयोध्या और वहां से बिहार के बक्सर तक कई लोगों के संपर्क में था। इसी वजह से अब जांच का दायरा कई राज्यों तक बढ़ा दिया गया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हत्या के पीछे सिर्फ व्यक्तिगत रंजिश थी या फिर इसके तार किसी बड़े राजनीतिक या आपराधिक नेटवर्क से जुड़े हैं।
सूत्रों के अनुसार जांच टीम को कुछ ऐसे डिजिटल और तकनीकी सबूत मिले हैं जिनसे यह संकेत मिल रहे हैं कि वारदात को पूरी योजना के साथ अंजाम दिया गया। पुलिस सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल रिकॉर्ड और बैंक ट्रांजैक्शन की भी जांच कर रही है। हालांकि अभी तक पुलिस ने आधिकारिक तौर पर पूरे घटनाक्रम का खुलासा नहीं किया है।
उधर, राज सिंह के गांव में भी इस मामले को लेकर तनाव का माहौल बना हुआ है। गांव के कुछ लोग परिवार के समर्थन में सामने आए हैं और उनका कहना है कि राज का स्वभाव शांत था और वह कभी किसी विवाद में नहीं पड़ा। वहीं कुछ स्थानीय लोग यह भी मानते हैं कि पिछले कुछ समय से उसकी गतिविधियां बदल गई थीं और वह अक्सर बाहर रहता था।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर बंगाल में चुनाव बाद हिंसा और राजनीतिक टकराव के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है। बीजेपी लगातार आरोप लगा रही है कि पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। वहीं राज्य प्रशासन का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।
फिलहाल पुलिस की कई टीमें उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में लगातार छापेमारी कर रही हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक रूप से संवेदनशील बन चुके इस हत्याकांड पर पूरे देश की नजर टिकी हुई है।
