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राम-सीता प्रिंट वाली साड़ी से एकता कपूर का चेहरा पोंछने पर विवाद, तान्या मित्तल सोशल मीडिया पर ट्रोल

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टीवी और सोशल मीडिया की दुनिया में हाल ही में एक वीडियो को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर और ‘बिग बॉस 19’ की पूर्व कंटेस्टेंट तान्या मित्तल एक कार्यक्रम के दौरान ऐसी हरकत के कारण चर्चा में आ गईं, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। दरअसल, मुंबई में टीवी प्रोड्यूसर एकता कपूर के एक इवेंट के दौरान तान्या मित्तल नारंगी रंग की एक साड़ी पहनकर पहुंचीं, जिसके पल्लू पर भगवान राम और माता सीता की तस्वीरें बनी हुई थीं। इसी दौरान वायरल वीडियो में दिखाई देता है कि एकता कपूर उसी साड़ी के पल्लू से अपना चेहरा पोंछती नजर आती हैं, जिसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा।

जैसे ही यह वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुआ, कई लोगों ने इसे धार्मिक भावनाओं से जोड़कर कड़ी आलोचना की। यूजर्स का कहना है कि देवी-देवताओं की तस्वीरों वाले कपड़ों का इस तरह इस्तेमाल करना आस्था का अनादर माना जा सकता है। कई लोगों ने तान्या मित्तल और कार्यक्रम के आयोजकों को निशाने पर लेते हुए कहा कि सार्वजनिक मंच पर इस तरह की घटना नहीं होनी चाहिए थी। इसी वजह से सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर तीखी बहस छिड़ गई और तान्या मित्तल को जमकर ट्रोल किया जाने लगा।

इस विवाद में सोशल मीडिया पर “वड़ा पाव गर्ल” के नाम से चर्चित चंद्रिका दीक्षित भी कूद पड़ीं। उन्होंने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर कोई और व्यक्ति ऐसी हरकत करता तो उसे भी भारी आलोचना का सामना करना पड़ता। हालांकि उनकी टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने उन्हें भी आड़े हाथों ले लिया और कहा कि यह मामला विवाद बढ़ाने का नहीं बल्कि संवेदनशीलता समझने का है। इस तरह देखते ही देखते यह मुद्दा सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा।

बताया जा रहा है कि तान्या मित्तल हाल ही में एकता कपूर की नई टैलेंट मैनेजमेंट पहल से जुड़े एक कार्यक्रम में शामिल हुई थीं। इसी कार्यक्रम के दौरान उनकी साड़ी और उससे जुड़ा यह वीडियो सामने आया। हालांकि इस पूरे विवाद पर तान्या मित्तल की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन सोशल मीडिया पर लोग लगातार अपनी-अपनी राय दे रहे हैं।

फिलहाल यह मामला मनोरंजन जगत और सोशल मीडिया दोनों जगह चर्चा का विषय बना हुआ है। कई लोग इसे फैशन और कला का हिस्सा मान रहे हैं, जबकि कई इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा बता रहे हैं। इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि फैशन और आस्था के बीच संतुलन कैसे बनाए रखा जाए, ताकि किसी भी समुदाय की भावनाएं आहत न हों।

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