
12 जून 2025 को अहमदाबाद से लंदन के लिए उड़ान भरने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 के दुर्घटनाग्रस्त होने की घटना को एक साल पूरा हो चुका है। यह हादसा भारत के सबसे भयावह विमान हादसों में से एक माना जाता है, जिसमें विमान में सवार यात्रियों और जमीन पर मौजूद लोगों समेत 260 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। लेकिन एक साल बाद भी पीड़ित परिवारों के मन में वही सवाल गूंज रहे हैं—आखिर यह हादसा हुआ कैसे और इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
हादसे के बाद सरकार ने जांच शुरू की, एयर इंडिया और टाटा समूह ने मुआवजे की घोषणा की और प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई। एयर इंडिया के अनुसार, लगभग 96 प्रतिशत प्रभावित परिवारों को अंतरिम मुआवजा दिया जा चुका है और अंतिम मुआवजे की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है। लेकिन जिन परिवारों ने अपने बेटे, बेटी, माता-पिता या जीवनसाथी को खोया है, उनके लिए पैसा कभी भी उस नुकसान की भरपाई नहीं कर सकता।
अहमदाबाद के कई परिवार आज भी उस काले दिन को भूल नहीं पाए हैं। किसी ने अपना इकलौता बेटा खोया, तो किसी ने अपने परिवार का कमाने वाला सदस्य। कई परिजन बताते हैं कि हादसे के बाद महीनों तक उन्हें नींद नहीं आई, मानसिक तनाव और अवसाद ने उनकी जिंदगी बदल दी। उनके अनुसार, लोग अक्सर मुआवजे की बात करते हैं, लेकिन कोई यह नहीं पूछता कि उनके जीवन में जो खालीपन आया है, वह कैसे भरेगा।
सबसे बड़ी नाराजगी जांच रिपोर्ट को लेकर है। हादसे के एक साल बाद भी अंतिम जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। ब्लैक बॉक्स और इंजन की जांच अभी भी जारी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जांच एजेंसियां इंजन से जुड़े तकनीकी पहलुओं और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की राय का इंतजार कर रही हैं, जिसके कारण अंतिम रिपोर्ट में देरी हो रही है।
प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले थे कि उड़ान भरने के तुरंत बाद दोनों इंजनों के फ्यूल कंट्रोल स्विच “कटऑफ” स्थिति में चले गए थे, जिससे इंजनों को ईंधन मिलना बंद हो गया। हालांकि जांच एजेंसियों ने अभी तक किसी अंतिम निष्कर्ष की पुष्टि नहीं की है और कहा है कि पूरी रिपोर्ट आने तक किसी भी संभावना को अंतिम नहीं माना जा सकता।
इस हादसे का एकमात्र जीवित बचा यात्री भी लगातार पारदर्शिता और सच्चाई की मांग कर रहा है। उसका कहना है कि हादसे से जुड़े सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके। उसने यह भी बताया कि शारीरिक रूप से बच जाने के बावजूद मानसिक आघात आज भी उसका पीछा नहीं छोड़ रहा।
हादसे की जगह पर भी समय जैसे थम सा गया है। जिस मेडिकल कॉलेज परिसर में विमान गिरा था, वहां आज भी उस भयावह दिन की यादें ताजा हैं। गुजरात सरकार ने क्षतिग्रस्त भवनों के पुनर्निर्माण की योजना बनाई है, लेकिन कई परिवार चाहते हैं कि वहां एक स्मारक भी बनाया जाए, ताकि हादसे में जान गंवाने वालों की याद हमेशा जीवित रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ एक विमान दुर्घटना की जांच नहीं है, बल्कि भारत की विमानन सुरक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता का भी सवाल है। जब तक अंतिम रिपोर्ट सामने नहीं आती, तब तक न केवल पीड़ित परिवार बल्कि पूरा देश यह जानने का इंतजार करता रहेगा कि आखिर उस दिन आसमान में ऐसा क्या हुआ था जिसने सैकड़ों परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी। एक साल बाद भी इस त्रासदी के घाव ताजा हैं और लोगों की सबसे बड़ी मांग है—सच्चाई सामने आए, जिम्मेदारी तय हो और भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।



