बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर मुंबई के जुहू इलाके में हुई फायरिंग ने एक बार फिर फिल्म इंडस्ट्री और अंडरवर्ल्ड के पुराने रिश्तों को लेकर बहस तेज कर दी है। 18 अक्टूबर को हुई इस घटना में टाइगर श्रॉफ सुरक्षित बच गए, जबकि उनके ड्राइवर समेत लोगों के घायल होने की खबर सामने आई। इस वारदात के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या मुंबई में कभी खौफ का पर्याय रहा अंडरवर्ल्ड फिर सक्रिय हो रहा है। हालांकि, इस घटना के पीछे किसका हाथ है और इसका मकसद क्या था, इसकी जांच अभी निर्णायक रूप से पूरी नहीं हुई है।
मुंबई में 1990 के दशक के दौरान दाऊद इब्राहिम, छोटा राजन और दूसरे आपराधिक गिरोहों के बीच दुश्मनी कई हिंसक घटनाओं की वजह बनी थी। उस दौर में फिल्म निर्माताओं और कलाकारों को कथित तौर पर धमकियों, जबरन वसूली और हमलों का सामना करना पड़ा। समय के साथ पुलिस कार्रवाई और बड़े गिरोहों के प्रमुख सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद मुंबई अंडरवर्ल्ड की गतिविधियों में गिरावट आई। टाइगर श्रॉफ पर हालिया फायरिंग ने उसी दौर की यादें ताजा कर दी हैं।
दाऊद इब्राहिम और छोटा राजन के बीच संघर्ष को लेकर यह सवाल भी उठता रहा है कि क्या उनकी दुश्मनी हिंदू-मुस्लिम आधार पर थी। इस मुद्दे पर पुराने इंटरव्यू और अपराध जगत के इतिहास में अलग-अलग पहलू सामने आए हैं। छोटा राजन ने 1996 में दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि उसके गिरोह में मुस्लिम सदस्य भी थे और वह उन्हें अपना भाई मानता था। उसने दाऊद के करीबी लोगों में हिंदुओं के होने का भी उल्लेख किया था। यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि गिरोहों के रिश्तों को केवल धार्मिक पहचान के आधार पर समझना अधूरा होगा।
रिटायर्ड डीसीपी प्रदीप सावंत ने इस सवाल पर कहा कि दाऊद और छोटा राजन के बीच हत्याओं और गैंगवार के पीछे मुख्य मकसद पैसा कमाना था। उनके मुताबिक, गैंगस्टर वसूली और आपराधिक गतिविधियों से आर्थिक फायदा हासिल करना चाहते थे। उन्होंने यह भी कहा कि किसी हत्या के पीछे आदेश देने वाले के मन में क्या था, यह निश्चित तौर पर वही बता सकता है। इसलिए बाद में किए गए दावों को बिना जांच के सच नहीं मानना चाहिए।
सावंत ने मुंबई में अंडरवर्ल्ड की गतिविधियों के इतिहास का जिक्र करते हुए बताया कि 1980 के दशक से शहर में शूटआउट की घटनाएं शुरू हो गई थीं। उनके अनुसार, 1990 के दशक में हथियारों की उपलब्धता बढ़ने के साथ गैंगों ने रंगदारी वसूलने पर ज्यादा ध्यान देना शुरू किया। दाऊद इब्राहिम, छोटा राजन, अरुण गवली और अबू सलेम जैसे गिरोहों ने अपने नेटवर्क का विस्तार किया। पुलिस की कार्रवाई बढ़ने पर कुछ गिरोहों ने दूसरे राज्यों से भी शूटरों को बुलाना शुरू किया।
पूर्व पुलिस अधिकारी ने फिल्म निर्माता नाजिम रिजवी की फिल्म ‘चोरी चोरी चुपके चुपके’ से जुड़े मामले का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, फिल्म के वित्तपोषण को लेकर छोटा शकील की ओर से कथित तौर पर पांच करोड़ रुपये की मांग किए जाने की शिकायत सामने आई थी। जांच के दौरान फोन टैपिंग से कुछ अहम बातचीत का पता चला था। यह मामला उस दौर की याद दिलाता है, जब फिल्म निर्माण के वित्तपोषण और रंगदारी के आरोपों के बीच संबंधों की जांच की जाती थी।
टाइगर श्रॉफ पर हुए हमले के मामले में एक कथित ऑडियो और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए लॉरेंस बिश्नोई गैंग की ओर से जिम्मेदारी लेने का दावा भी सामने आया है। हालांकि, ऐसे दावों की प्रामाणिकता और हमले में गैंग की वास्तविक भूमिका को लेकर पुलिस की जांच अहम है। रिपोर्टों के अनुसार, इस घटना के सिलसिले में तीन संदिग्धों को राजस्थान के कोटा से पकड़े जाने की जानकारी भी सामने आई है।
मुंबई में अतीत में गैंगवार, बम धमाकों और फिल्मी हस्तियों पर हमलों जैसी घटनाएं हो चुकी हैं। लेकिन मौजूदा घटनाओं को सीधे 1990 के दशक की वापसी मान लेना जल्दबाजी होगी। प्रदीप सावंत का कहना है कि मुंबई ने इससे कहीं गंभीर दौर देखा है और केवल एक-दो फायरिंग की घटनाओं से शहर को डराया नहीं जा सकता। फिलहाल टाइगर श्रॉफ पर हमले की जांच और इसके पीछे की वास्तविक वजह का पता लगना सबसे महत्वपूर्ण है।
