महाराष्ट्र के उल्हासनगर से ट्रैफिक जाम की वजह से सामने आई एक हैरान करने वाली घटना ने शहर की यातायात व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद रिक्शे से अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में भारी जाम में वाहन फंस गया। अस्पताल पहुंचने में हुई देरी के बीच महिला ने रिक्शे के अंदर ही बच्चे को जन्म दे दिया। राहत की बात यह रही कि प्रसव के बाद मां और नवजात दोनों सुरक्षित हैं।
जानकारी के मुताबिक महिला की पहचान 30 वर्षीय हरिकला थापा के रूप में हुई है, जो उल्हासनगर के कैंप नंबर 3 के सेक्शन 20 में रहती हैं। प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद परिवार ने उन्हें अस्पताल ले जाने के लिए रिक्शा बुलाया। बताया गया कि उनके घर के आसपास तत्काल दूसरा वाहन उपलब्ध नहीं था, इसलिए परिवार रिक्शे से ही उन्हें उल्हासनगर के सेंट्रल अस्पताल लेकर निकल पड़ा।
अस्पताल की तरफ जाते समय रिक्शा न्यू एरा इलाके में सेवा सदन और मेयर होटल के बीच जाम में फंस गया। महिला के साथ मौजूद रिश्तेदार के मुताबिक वाहन करीब 20 मिनट तक लगभग आगे नहीं बढ़ सका। इसी दौरान महिला की प्रसव पीड़ा बढ़ गई और अस्पताल से थोड़ी दूरी पर ही रिक्शे के अंदर बच्चे का जन्म हो गया।
स्थिति की जानकारी मिलने के बाद अस्पताल के डॉक्टरों, नर्सों और अन्य कर्मचारियों ने तुरंत मदद की। बताया गया कि मेडिकल स्टाफ ने रिक्शे में ही प्रसव कराने में सहायता की और बच्चे के जन्म के बाद मां और नवजात को अस्पताल के प्रसूति वार्ड तक पहुंचाया गया। इस दौरान वार्डबॉय और एंबुलेंस चालक ने भी महिला को स्ट्रेचर के जरिए अंदर ले जाने में मदद की।
अस्पताल प्रशासन की ओर से बताया गया कि महिला और नवजात दोनों की हालत ठीक है। बच्चे की जांच के बाद परिवार को भी उसके स्वस्थ होने की जानकारी दी गई। इस घटना में सबसे बड़ी राहत यही रही कि जाम के बीच अस्पताल तक पहुंचने में हुई देरी के बावजूद मां और बच्चे को कोई गंभीर नुकसान नहीं हुआ।
घटना सामने आने के बाद उल्हासनगर की ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय इलाकों में लगातार लगने वाले जाम का असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर तो पड़ता ही है, लेकिन आपात स्थिति में यही जाम गंभीर समस्या बन सकता है। गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचने में हुई देरी ने इस चिंता को और सामने ला दिया है।
उल्हासनगर की इस घटना को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि शहर में इमरजेंसी मेडिकल सेवाओं तक पहुंच को आसान बनाने के लिए ट्रैफिक प्रबंधन कितना प्रभावी है। खास तौर पर ऐसे रास्तों पर, जहां अस्पताल और रिहायशी इलाके आसपास हों, जाम की स्थिति में एंबुलेंस और दूसरे आपातकालीन वाहनों की आवाजाही को प्राथमिकता देने की व्यवस्था कितनी कारगर है, इस पर ध्यान देने की जरूरत बताई जा रही है।
महाराष्ट्र में वाहन के अंदर प्रसव का यह पहला मामला नहीं है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 2014 से 2024 के बीच महाराष्ट्र में करीब 40 हजार बच्चों का जन्म 108 एंबुलेंस में हुआ। हालांकि इनमें कई मामलों की वजह प्रसव पीड़ा का तेजी से बढ़ना या ग्रामीण इलाकों से अस्पताल तक पहुंचने में लंबी दूरी जैसी परिस्थितियां रही हैं। उल्हासनगर की घटना में खास बात यह है कि यहां शहरी ट्रैफिक जाम ने अस्पताल पहुंचने में परेशानी पैदा की।
यह घटना एक तरफ मां और बच्चे के सुरक्षित रहने की राहत देती है, तो दूसरी तरफ शहर की यातायात व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल भी छोड़ जाती है। अगर किसी गर्भवती महिला को अस्पताल से कुछ ही दूरी पहले जाम में फंसने के कारण सड़क पर ही बच्चे को जन्म देना पड़े, तो यह केवल एक परिवार की परेशानी नहीं बल्कि आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और ट्रैफिक प्रबंधन के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत को भी सामने लाता है। फिलहाल मां और नवजात दोनों सुरक्षित बताए गए हैं और अस्पताल में उनकी देखभाल की गई।
