उत्तर प्रदेश में पिछले करीब 48 घंटे से जारी भारी बारिश ने कई जिलों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। लगातार बारिश के कारण शहरों और गांवों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है, कई जगह पेड़ और कच्ची दीवारें गिर गई हैं और मकानों को भी नुकसान पहुंचा है। राज्य के 63 जिलों में सामान्य से काफी अधिक बारिश दर्ज की गई है। अलग-अलग जिलों से जनहानि की खबरें भी सामने आई हैं। प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज करने के साथ प्रभावित परिवारों तक मदद पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।
मौसम विभाग के मुताबिक 27 सितंबर को भी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में भारी बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी बहुत भारी बारिश की चेतावनी है। मौसम विभाग की चेतावनी के अनुसार 27 सितंबर के बाद स्थिति में सुधार की संभावना है, हालांकि स्थानीय स्तर पर बारिश और गरज-चमक जारी रह सकती है।
लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर समेत कई शहरों में बारिश के कारण सड़कों पर पानी भर गया है। कई स्थानों पर पेड़ गिरने से यातायात प्रभावित हुआ है। गोरखपुर में मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 26 सितंबर तक 24 घंटे में 33 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी और 27 सितंबर को भी गरज-चमक के साथ तेज हवाओं की संभावना जताई गई है। कानपुर में भी 26 सितंबर को भारी बारिश और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं की चेतावनी जारी की गई थी।
बारिश का असर सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं है। कई ग्रामीण इलाकों में खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान पहुंचा है। राहत आयुक्त ने जिलाधिकारियों को प्रभावित किसानों और परिवारों से संपर्क कर नुकसान का आकलन कराने तथा नियमों के अनुसार सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। जरूरत पड़ने पर फायर सर्विस, पीएसी, सिविल डिफेंस, होमगार्ड और आपदा मित्रों की मदद लेने को भी कहा गया है।
बारिश और तेज हवाओं के कारण पिछले दो दिनों में कई जिलों से मौतों की सूचना सामने आई है। पेड़, कच्ची दीवार और मकान गिरने जैसी घटनाओं में लोगों की जान गई है। अलग-अलग जिलों से सामने आ रहे आंकड़ों के मुताबिक अवध, बुंदेलखंड, मध्य यूपी, ब्रज, वाराणसी और गोरखपुर-बस्ती क्षेत्र में भी जनहानि हुई है। राहत एजेंसियों को प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
मौसम की यह स्थिति बंगाल की खाड़ी और मध्य भारत में बने मौसमी सिस्टम से जुड़ी है। मौसम विभाग के अनुसार उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश और उससे सटे उत्तरी छत्तीसगढ़ के ऊपर बना दबाव क्षेत्र दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ा था। इसके प्रभाव से राज्य के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां तेज हुईं। इससे पहले भी मौसम विभाग ने पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की थी।
27 सितंबर को मुरादाबाद, रामपुर, बरेली और पीलीभीत समेत कुछ जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, बिजनौर, अमरोहा, शाहजहांपुर, संभल और बदायूं समेत कई जिलों में भी भारी बारिश का अनुमान है। इन क्षेत्रों में गरज-चमक और तेज हवाओं को लेकर लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव और कुछ क्षेत्रों में अचानक बाढ़ का खतरा भी बढ़ गया है। आजमगढ़, गोरखपुर, देवरिया, बलिया, लखनऊ, कानपुर नगर और फतेहपुर समेत कई जिलों के जलग्रहण क्षेत्रों में फ्लैश फ्लड की आशंका को लेकर भी प्रशासन को सतर्क किया गया है। ऐसे में लोगों से जलभराव वाले रास्तों और कमजोर मकानों के आसपास अनावश्यक रूप से जाने से बचने की अपील की गई है।
मौसम विभाग के मौजूदा पूर्वानुमान के अनुसार 28 सितंबर से राज्य में बारिश की गतिविधियों में कमी आने की उम्मीद है। हालांकि स्थानीय स्तर पर मौसम में अचानक बदलाव हो सकता है। प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में राहत-बचाव व्यवस्था पर नजर रखी जा रही है और जिलाधिकारियों को लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।
