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यूपी की वोटर लिस्ट में बड़ा फेरबदल

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उत्तर प्रदेश में 2026 के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद जारी हुई अंतिम मतदाता सूची ने राज्य की राजनीतिक तस्वीर को काफी हद तक बदल दिया है। इस प्रक्रिया में जहां एक तरफ कई जिलों में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए गए, वहीं दूसरी ओर कुछ जिलों में नए मतदाताओं की रिकॉर्ड संख्या जुड़ी है। सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा कानपुर और प्रयागराज से सामने आया है, जिसने सभी राजनीतिक दलों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

कानपुर नगर में इस बार भारी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। आंकड़ों के अनुसार यहां करीब 6.87 लाख वोटरों के नाम काटे गए, जिससे कुल मतदाता संख्या में लगभग 19.42 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है। अब जिले में कुल मतदाता संख्या करीब 28.51 लाख रह गई है। यह गिरावट इतनी बड़ी है कि स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर इसका सीधा असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

हालांकि, इस गिरावट के बीच नए मतदाताओं की एंट्री भी हुई है। ड्राफ्ट सूची के बाद लगभग 2.14 लाख नए वोटर जुड़े हैं, जिनमें बड़ी संख्या 18-19 आयु वर्ग के युवाओं की है। इससे साफ संकेत मिलता है कि जहां एक तरफ पुराने और अपात्र नाम हटाए गए हैं, वहीं युवा मतदाताओं को जोड़ने पर भी जोर दिया गया है।

दूसरी ओर प्रयागराज में बिल्कुल उलट तस्वीर देखने को मिली है। यहां बड़ी संख्या में पुराने नाम हटाए जाने के बावजूद नए मतदाताओं की रिकॉर्ड एंट्री हुई है। अंतिम सूची के अनुसार प्रयागराज में 3.29 लाख नए वोटर जुड़े हैं, जिससे कुल मतदाता संख्या बढ़कर करीब 38.65 लाख हो गई है। हालांकि, इस दौरान 8.26 लाख नाम भी हटाए गए, जो दर्शाता है कि सूची को साफ और अपडेट करने की प्रक्रिया काफी व्यापक रही है।

पूरे राज्य की बात करें तो इस पुनरीक्षण प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची में बड़े स्तर पर बदलाव देखने को मिला है। चुनाव आयोग के अनुसार ड्राफ्ट सूची की तुलना में अंतिम सूची में करीब 84 लाख मतदाता बढ़े हैं और कुल संख्या 13.39 करोड़ तक पहुंच गई है।

प्रशासन का कहना है कि यह प्रक्रिया मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने के लिए की गई है। इसमें मृतक, डुप्लीकेट, स्थानांतरित या अपूर्ण दस्तावेज वाले मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। वहीं, नए योग्य नागरिकों को जोड़कर सूची को संतुलित किया गया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बदलाव का असर आने वाले विधानसभा चुनावों पर साफ दिखाई देगा। जहां कानपुर जैसे क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या घटने से चुनावी रणनीतियां बदलेंगी, वहीं प्रयागराज में नए मतदाताओं की बढ़ती संख्या चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकती है।

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