
यूपी में आरटीई नियमों में बड़ा बदलाव: किराए के मकान में रहने वाले बच्चों को प्रवेश नहीं
उत्तर प्रदेश में शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत निजी विद्यालयों में गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए नि:शुल्क प्रवेश की प्रक्रिया में इस वर्ष महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। शिक्षा विभाग ने आरटीई नियमों में संशोधन करते हुए स्पष्ट किया है कि किराए के मकान में रहने वाले बच्चों को आरटीई के तहत प्रवेश का लाभ नहीं मिलेगा, जब तक कि उनके अभिभावकों के पास संबंधित रजिस्ट्रार कार्यालय में घर का पंजीकरण (residence proof) न हो। इससे पहले यह नियम किराए पर रहने वाले परिवारों के बच्चों को भी पात्रता देता था, लेकिन अब स्थानीय निवासी होने का प्रमाण आवश्यक कर दिया गया है।
नए नियमों के अनुसार, जो छात्र इस अधिनियम के तहत प्रवेश लेना चाहते हैं, उनके अभिभावकों को घर का पंजीकरण दाखिल करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, बच्चों के यूनिफॉर्म और अन्य शैक्षणिक सहायता जैसे खर्च सीधे उनके अभिभावकों के बैंक खातों में भेजे जाएंगे, जिसके लिए बैंक से आधार कार्ड का सत्यापन भी लागू किया गया है—यह कदम प्रवेश प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
राजधानी सहित पूरे प्रदेश में संचालित करीब 1,576 निजी स्कूलों में लगभग 21,000 आरटीई सीटों पर 2 फरवरी से ऑनलाइन आवेदन प्राप्त किए जाएंगे। बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस बार न केवल स्कूलों और सीटों की संख्या में वृद्धि की गई है, बल्कि विभाग की वेबसाइट पर दस्तावेज़ों की ऑनलाइन प्रतियाँ भी अपलोड की जाएँगी और संबंधित प्रबंधक तथा प्रधानाचार्य यूजर आईडी से उन्हें सत्यापित कर सकेंगे।
आरटीई प्रवेश प्रक्रिया को इस बार तीन चरणों में विभाजित किया गया है—पहला चरण 2 से 16 फरवरी, दूसरा चरण 21 फरवरी से 7 मार्च, और तीसरा 12 से 25 मार्च तक चलेगा। प्रत्येक चरण के बाद लॉटरी प्रणाली के माध्यम से नामांकन सूची जारी की जाएगी, पहली लॉटरी 18 फरवरी को, दूसरी 9 मार्च को और तीसरी 27 मार्च को प्रकाशित की जाएगी।
प्रवेश के लिए बच्चे और अभिभावक को कुछ आधिकारिक दस्तावेज़ भी प्रस्तुत करना होंगे, जिनमें तहसीलदार द्वारा निर्गत जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, ग्रामीण क्षेत्रों के लिए जॉब कार्ड, चिकित्सा प्रमाणपत्र और आधार कार्ड शामिल हैं। नियमों के मुताबिक, केवल इन आवश्यक दस्तावेजों के साथ ही आवेदन स्वीकार किए जाएंगे, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि आरटीई के तहत दाखिला वास्तव में आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को ही मिले।
शिक्षा विभाग ने बताया कि पिछले वर्ष अनेक बच्चों के लिए यह प्रवेश प्रक्रिया लागू की गई थी और इस बार सरकार ने प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाने के लिए नियमों को कड़ा किया है ताकि अनुपयोगी या गलत दस्तावेज़ जमा करने की संभावना को न्यूनतम किया जा सके। नए संशोधनों का उद्देश्य आरटीई अधिनियम के मूल लक्ष्य—समान शिक्षा अवसर प्रदान करना—को और अधिक प्रभावी रूप से लागू करना है।
इस बदलाव से जुड़ी कुछ प्रतिक्रियाएँ मिल रही हैं कि नियमों के सख़्त होने से कुछ परिवारों के लिए प्रवेश प्रक्रिया कठिन हो सकती है, विशेषकर वे जिनके पास घर के पंजीकरण से संबंधित दस्तावेज़ नहीं हैं। हालांकि, विभाग अधिकारियों का कहना है कि यह निर्णय प्रवेश प्रक्रिया की विश्वसनीयता बढ़ाने और संसाधनों के सही लाभार्थियों तक पहुंच सुनिश्चित करने के दृष्टिकोण से लिया गया है।
कुल मिलाकर, आरटीई नियमों में यह बड़ा बदलाव और आगामी ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया इस साल शिक्षा के अधिकार के तहत गरीब तथा वंचित बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुँचाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, साथ ही प्रवेश प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और सख्ती लाने का प्रयास भी है।



