Site icon Prsd News

UN महासभा के बाद अमेरिका ने 2 ईरानी राजनयिकों को निकाला, रुबियो ने कहा- ‘अब इन्हें यहां रहने नहीं देंगे’

images 8

संयुक्त राष्ट्र महासभा के खत्म होने के बाद अमेरिका ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल के दो सदस्यों को देश से बाहर कर दिया है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, दोनों राजनयिकों को पहले ही अमेरिका छोड़ने का निर्देश दिया गया था, लेकिन वे न्यूयॉर्क में ही मौजूद रहे। इसके बाद अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने उनके खिलाफ कार्रवाई की और दोनों को देश से बाहर भेज दिया गया। एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो अपने निर्देशों को लेकर गंभीर हैं।

अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिस्सा लेने वाले ईरानी प्रतिनिधिमंडल के दो सदस्य कार्यक्रम खत्म होने के काफी समय बाद भी न्यूयॉर्क में मौजूद थे। अमेरिकी प्रशासन ने शुक्रवार को एक बार फिर ईरानी मिशन को दोनों के वहां मौजूद होने की जानकारी दी और उन्हें तत्काल अमेरिका छोड़ने के लिए कहा। इसके बाद एक राजनयिक शुक्रवार रात न्यूयॉर्क से रवाना हुआ, जबकि दूसरे ने शनिवार सुबह अमेरिका छोड़ा।

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच संबंध बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। दोनों देशों के बीच संघर्ष खत्म करने और बातचीत आगे बढ़ाने की कोशिशें चल रही हैं, लेकिन कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान दोनों पक्षों के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत भी हुई थी, लेकिन इन वार्ताओं से कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया।

इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भूमिका अहम बताई जा रही है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, रुबियो ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल को न्यूयॉर्क से तत्काल निकलने का निर्देश दिया था। बाद में जब पता चला कि प्रतिनिधिमंडल के दो सदस्य अभी भी न्यूयॉर्क में मौजूद हैं, तो उन्हें देश से बाहर करने की कार्रवाई की गई। अमेरिकी अधिकारी ने इस कदम को यह दिखाने वाला बताया कि रुबियो अपने फैसले पर कायम हैं।

इससे पहले भी ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और उनके प्रतिनिधिमंडल को संयुक्त राष्ट्र महासभा के बाद अमेरिका छोड़ने का निर्देश दिए जाने की खबर सामने आई थी। उस समय ईरानी पक्ष ने अमेरिकी दावे को खारिज करते हुए कहा था कि प्रतिनिधिमंडल की वापसी पहले से तय कार्यक्रम के मुताबिक हुई थी और इसकी जानकारी अमेरिकी विदेश विभाग को पहले ही दे दी गई थी।

ईरानी मिशन ने यह भी कहा था कि उसके प्रतिनिधिमंडल ने पहले से तय यात्रा कार्यक्रम के अनुसार न्यूयॉर्क छोड़ा था। ईरानी पक्ष ने अमेरिकी दावों को निराधार बताया था। हालांकि अब अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि दो सदस्य महासभा समाप्त होने के बाद भी न्यूयॉर्क में मौजूद थे और उन्हें अलग से तत्काल देश छोड़ने के लिए कहा गया था। इस वजह से दोनों देशों के दावों में अंतर बना हुआ है।

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का एक बड़ा मुद्दा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भी बना हुआ है। ईरान की ओर से कथित तौर पर यह संकेत दिया गया था कि अगर अमेरिका बंदरगाहों की नाकाबंदी हटाता है, जमी हुई ईरानी संपत्तियों को जारी करता है और तेल बिक्री से जुड़े प्रतिबंधों में राहत देता है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने पर विचार किया जा सकता है। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर किसी भी समझौते में अमेरिका अपने हितों से समझौता नहीं करेगा। दूसरी तरफ ईरान अमेरिका की कई मांगों और नीतियों का विरोध कर रहा है। इसी वजह से दोनों देशों के बीच बातचीत की प्रक्रिया लगातार दबाव में है और राजनयिक स्तर पर तनाव कम होने के बजाय कई मामलों में बढ़ता नजर आ रहा है।

ईरानी राजनयिकों को अमेरिका से बाहर किए जाने की यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब दोनों देशों के बीच संघर्ष को खत्म करने के लिए मध्यस्थों के जरिए संपर्क की कोशिशें जारी हैं। लेकिन बातचीत में प्रगति नहीं होने और दोनों पक्षों के कड़े रुख के कारण स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है। ऐसे में राजनयिकों को बाहर किए जाने की घटना अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का एक और संकेत मानी जा रही है।

फिलहाल अमेरिका का कहना है कि दोनों ईरानी राजनयिकों ने देश छोड़ने के निर्देश का पालन नहीं किया, जिसके बाद उन्हें बाहर किया गया। वहीं ईरानी पक्ष पहले ही प्रतिनिधिमंडल की वापसी को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम का हिस्सा बता चुका है। दोनों देशों के बीच जारी मतभेदों के बीच अब नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में बातचीत दोबारा शुरू होती है या तनाव और बढ़ता है।

Exit mobile version