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ट्रंप की चेतावनियों के बीच संभावित युद्ध और अमेरिका द्वारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले हाई-टेक हथियार

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अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन चुका है, और इस साल 16 जनवरी 2026 को प्रकाशित खबर में इस संभावित टकराव के उस सैन्य परिदृश्य का विश्लेषण किया गया है, जो अगर संघर्ष की स्थिति बनती है तो सामने आ सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी सरकार को बार-बार चेतावनी दी है कि अगर उसने अपने भीतर जारी विरोध प्रदर्शनों पर हिंसा नहीं रोकी और आम जनता के अधिकारों का उल्लंघन जारी रखा, तो अमेरिका सैन्य विकल्पों पर विचार कर सकता है। ट्रंप की इन धमकियों के बीच यह सवाल उठता है कि युद्ध की स्थिति में अमेरिका किन हथियारों और रणनीतियों का इस्तेमाल कर सकता है।

समाचार के अनुसार, फिलहाल ईरान के आसपास अमेरिका की सीधी सैन्य तैनाती सीमित है, लेकिन रणनीतिक रूप से वॉशिंगटन ने अपनी मौजूदगी बढ़ाने के संकेत दिए हैं। युद्ध की स्थिति में अमेरिका सैनिकों को जमीन पर भेजने के बजाय दूर से प्रेशर और हमला करने वाली तकनीकों का इस्तेमाल कर सकता है, ताकि उसकी सेना को कम जोखिम के साथ लक्ष्य पर प्रभावी कार्रवाई करने का मौका मिले।

संभावित सैन्य उपकरणों में टोमाहॉक क्रूज़ मिसाइल (Tomahawk missile) एक प्रमुख हथियार माना जाता है। यह मिसाइल जमीन और समुद्री लक्ष्य दोनों को दूर से निशाना बनाने में सक्षम है और इसे युद्धपोतों या पनडुब्बियों से लॉन्च किया जा सकता है। टोमाहॉक मिसाइलों का उपयोग पहले भी ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले में किया गया था, जहाँ कई मिसाइलें ईरानी न्यूक्लियर साइट्स को निशाना बनाने के लिए छोड़ी गई थीं।

इसके अलावा JASSM (Joint Air-to-Surface Standoff Missile) मिसाइल भी युद्ध के दौरान इस्तेमाल की जा सकती है। JASSM अत्यधिक सटीकता वाली मिसाइल है, जिसे अमेरिकी F-15, F-16, F-35 जैसे लड़ाकू विमानों या भारी बॉम्बर जैसे B-1, B-2, B-52 से छोड़ा जा सकता है। इसकी मारक दूरी लगभग 1000 किलोमीटर तक होती है, जिससे यह दुश्मन के गहरे भीतर स्थित ठिकानों को निशाना बना सकती है।

इसके अतिरिक्त, ड्रोन (无人 विमान) का इस्तेमाल भी युद्ध की स्थिति में किया जा सकता है। ड्रोन हमले में पायलटों को खतरे में डाले बिना दुश्मन के ठिकानों पर हमला किया जा सकता है, साथ ही ये निगरानी और खुफिया डेटा जुटाने में भी मददगार होंगे, जिससे अमेरिका को रणनीतिक लाभ मिलेगा।

एक और गंभीर विकल्प साइबर हमला है, जिसमें अमेरिकी साइबर सुरक्षा बल ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम तथा कमांड-कंट्रोल नेटवर्क को निशाना बना सकते हैं। साइबर हमले की रणनीति से ईरान की सैन्य क्षमताओं को बाधित किया जा सकता है और साथ ही ईरान में इंटरनेट सेवाओं को बहाल करके प्रदर्शनकारियों को समर्थन देकर सरकार पर आंतरिक दबाव भी बढ़ाया जा सकता है।

यह समस्या सिर्फ सैन्य रणनीति तक सीमित नहीं है; क्षेत्रीय देश जैसे सऊदी अरब, कतर और ओमान ने अमेरिका से ईरान को एक और मौका देने की अपील की है, ताकि तनाव कम हो और युद्ध जैसी स्थिति विकसित न हो। दूसरी ओर, ईरान ने भी चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका हमला करता है तो वह अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई कर सकता है, जिससे मध्यपूर्व में स्थिति और जटिल हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच कोई पूर्ण-सामरिक युद्ध नहीं हुआ है, लेकिन दोनों पक्षों की चेतावनियाँ, सैन्य तैयारी और कूटनीतिक दबाव दुनिया भर में चिंता का विषय हैं। यह भी ध्यान देने योग्य है कि ईरान ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम और मिसाइल क्षमताओं को मजबूत किया है, जिससे अमेरिका के संभावित हवाई हमलों का प्रभाव कम करने की क्षमता बढ़ सकती है।

इस तरह के तनाव से स्पष्ट है कि वर्तमान वैश्विक संदर्भ में अमेरिका-ईरान रिश्तों का भविष्य अनिश्चित है और कोई भी अप्रत्याशित घटना क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा पर गहरा असर डाल सकती है।

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