
मध्य पूर्व में युद्ध का बिगुल बज चुका है और संकट एक बार फिर पूरी दुनिया की नजरों के केंद्र में आ गया है। संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने भी जवाबी मिसाइल और ड्रोन हमलों की शुरुआत कर दी है, जिससे खाड़ी क्षेत्र से लेकर तेहरान तक माहौल बेहद तनावपूर्ण और अस्थिर हो गया है। इस बहु-दिवसीय संघर्ष में नागरिक इलाकों सहित कई देशों के क्षेत्रों में धमाकों और मिसाइलों की बरसात दर्ज की गई है।
गृह युद्ध की तरह फैल रहे इस संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी 2026 को तब हुई जब अमेरिका और इज़राइल ने “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” नामक संयुक्त सैन्य अभियान के तहत ईरान के न्यूक्लियर, बैलिस्टिक मिसाइल साइट्स और नेतृत्व केंद्रों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। इस हमले में ईरान के कई सैन्य ठिकानों के साथ साथ राष्ट्रपति भवन और अन्य नगरिक क्षेत्रों को भी निशाना बनाया गया, जिससे ईरान में भारी तबाही हुई और सौ से अधिक सैनिक तथा नागरिकों की मौत की खबरें आने लगीं।
ईरान ने इन हमलों का जवाब बेहद तीव्रता से किया। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने खाड़ी देशों के उस क्षेत्र में जवाबी मिसाइलें और ड्रोन छोड़े जहाँ अमेरिका और उसके सहयोगी के ठिकाने मौजूद हैं। दुबई और अबू धाबी जैसे सिविलियन शहरों और हवाई अड्डों के पास मिसाइलें गिरने की घटनाएं भी सामने आईं, जिससे कई जगहों पर धमाके और आग के दृश्य रिकॉर्ड किए गए, और कम से कम एक व्यक्ति की मौत भी हुई।
특히 संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में दुबई के पाम जुमैराह और बुर्ज खलीफा के पास धमाके और मिसाइलों की आवाजें सुनी गईं, जिससे लोगों में भय फैल गया और आपातकालीन सेवाओं को सक्रिय होना पड़ा। स्थानीय रक्षा प्रणाली ने कई मिसाइलों को तो रोक लिया, लेकिन कुछ मिली गैजेटों के मलबे से भी यात्री और नागरिक प्रभावित हुए।
खाड़ी क्षेत्रों में न केवल मिसाइलों का प्रहार हो रहा है, बल्कि सऊदी अरब और कतर में भी ईरानी हमलों की खबरें आई हैं, जहां अमेरिकन और सहयोगी देशों के सैन्य आधार, दूतावासों और ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को लक्ष्य बनाया गया। कई क्षेत्रों में एयरस्पेस बंद कर दिए गए हैं और यात्रियों के लिए चेतावनियां जारी हुई हैं।
वैश्विक स्तर पर इस संघर्ष का असर तेजी से दिख रहा है। तेल की कीमतों में बड़ी उछाल आई है, यात्राओं और व्यापार मार्गों को भारी रुकावटों का सामना करना पड़ा है, तथा कई देशों ने अपने नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने या निकालने का निर्णय लिया है। युद्ध की स्थिति के कारण हर कोई आशंका में है कि यह संघर्ष सिर्फ़ कुछ दिनों का नहीं रहेगा, बल्कि लंबे और व्यापक रूप से फैल सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिया है कि युद्ध कई सप्ताह तक चल सकता है, और यह वित्तीय, सामाजिक और राजनीतिक रूप से भी दुनिया को प्रभावित करेगा।
इस संपूर्ण स्थिति से स्पष्ट होता है कि मध्य पूर्व में तनाव अब सिर्फ क्षेत्रीय विवाद नहीं रहा; यह एक वैश्विक सुरक्षा चुनौती बन चुका है, जिसे शांतिपूर्ण ढंग से हल करना दुनिया की उत्कृष्ट प्राथमिकता बन चुकी है।



