मध्य पूर्व में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल ने अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के बाद ईरान पर नए सैन्य हमले के विकल्पों की तैयारी की है। संभावित कार्रवाई में ईरान के परमाणु ठिकानों, मिसाइल और ड्रोन भंडार तथा ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है। हालांकि, अभी तक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से किसी नए हमले को अंतिम मंजूरी दिए जाने की पुष्टि नहीं हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार, संभावित सैन्य अभियान छोटा लेकिन बेहद तीव्र हो सकता है। इसमें कुछ दिनों तक लगातार हमले करके ईरान पर परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौता करने का दबाव बनाने की रणनीति पर विचार किया जा रहा है। संभावित लक्ष्यों में ईरान की परमाणु सुविधाओं के अलावा मिसाइल और ड्रोन क्षमता से जुड़े ठिकाने तथा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के कमांड सेंटर शामिल बताए गए हैं। ये फिलहाल रिपोर्ट में सामने आए संभावित विकल्प हैं, किसी तय सैन्य कार्रवाई की आधिकारिक घोषणा नहीं।
ईरान के गहरे पहाड़ी इलाके में स्थित पिकैक्स माउंटेन परमाणु केंद्र को लेकर भी चर्चा सामने आई है। रिपोर्ट में इस जगह को संभावित लक्ष्यों में शामिल किए जाने की बात कही गई है। इससे पहले ट्रंप ने इस ठिकाने के खिलाफ भारी बम के इस्तेमाल पर विचार करने का संकेत दिया था। हालांकि, किसी खास ठिकाने पर हमले का फैसला हुआ है या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है।
अमेरिका के सामने इस संभावित कार्रवाई को लेकर कई चुनौतियां भी हैं। ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमले से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने और अमेरिका में ईंधन महंगा होने का खतरा है। इसके अलावा, ईरान की जवाबी कार्रवाई से संघर्ष अन्य खाड़ी देशों तक फैल सकता है। ऐसे हालात में सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ कूटनीतिक बातचीत का रास्ता भी महत्वपूर्ण बना हुआ है।
दूसरी ओर, ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उस पर दोबारा हमला किया गया तो जवाबी कार्रवाई क्षेत्र तक सीमित नहीं रह सकती। रिपोर्टों के मुताबिक, तेहरान ने खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा संयंत्रों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाए जाने की आशंका का संकेत दिया है। इससे तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। हालांकि, संभावित जवाबी हमलों के दावों को वास्तविक कार्रवाई से अलग समझना जरूरी है।
तनाव के बीच इजरायली वायुसेना ने ईरान की सीमा के करीब लंबी दूरी का सैन्य अभ्यास भी किया। रिपोर्ट के अनुसार, इसमें लड़ाकू विमानों और हवा में ईंधन भरने वाले विमानों ने हिस्सा लिया। उड़ान का मार्ग और दूरी संभावित लंबी दूरी के सैन्य अभियान की तैयारी से जोड़कर देखे जा रहे हैं। इजरायल ने इस गतिविधि को अभ्यास बताया, जबकि अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों के बीच ईरान को लेकर सैन्य विकल्पों पर चर्चा की खबरें भी सामने आई हैं।
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की इजरायल यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ ईरान से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की भी रिपोर्ट है। इस घटनाक्रम से संकेत मिलता है कि दोनों देश सुरक्षा और सैन्य रणनीति पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। फिर भी, सैन्य योजनाएं तैयार होना और उन पर अमल करने का अंतिम निर्णय लेना दो अलग बातें हैं। ट्रंप प्रशासन ने पहले भी ईरान के खिलाफ नए हमलों को लेकर सावधानी बरती है।
अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनाव भी इस घटनाक्रम के संदर्भ में अहम माने जा रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप चुनाव से पहले बड़े सैन्य टकराव से बचने की बात कह चुके हैं, जबकि ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर अमेरिकी दबाव जारी है। फिलहाल यह तय नहीं है कि चुनावों के बाद सैन्य कार्रवाई होगी या बातचीत के जरिए किसी समझौते की कोशिश आगे बढ़ेगी। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बयान और कूटनीतिक संपर्क इस दिशा को समझने के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
