उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर समाजवादी पार्टी ने अपनी चुनावी तैयारियों को आगे बढ़ाते हुए हर विधानसभा क्षेत्र में 27 हजार अतिरिक्त वोट जोड़ने का लक्ष्य तय किया है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के साथ बैठक में इस रणनीति की जानकारी दी। पार्टी की योजना सभी 403 विधानसभा सीटों पर संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने और नए मतदाताओं व परिवारों तक पहुंच बढ़ाने की है। इस रणनीति को पार्टी के भीतर ‘मिशन 27K’ के तौर पर देखा जा रहा है।
अखिलेश यादव ने कहा है कि पार्टी हर विधानसभा में अपने वोटों की संख्या 27 हजार बढ़ाने के लिए काम करेगी। उन्होंने इसके लिए तकनीक के इस्तेमाल, घर-घर संपर्क और लोगों की समस्याओं को समझने पर जोर दिया है। उनके मुताबिक, पार्टी उन परिवारों तक भी पहुंच बनाएगी जो उसके अनुसार अन्याय या अत्याचार से प्रभावित रहे हैं। यह रणनीति केवल चुनावी आंकड़े बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय करने से भी जोड़ी जा रही है।
सपा की रणनीति को 2022 विधानसभा चुनाव के आंकड़ों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में करीब 50 सीटों पर जीत और हार का अंतर 10 हजार वोट से कम रहा था। इनमें से अधिकतर सीटों पर बीजेपी या उसके सहयोगी दलों के उम्मीदवार जीते थे। सपा अब ऐसे क्षेत्रों में अपने वोट आधार को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रही है, जहां पिछले चुनाव में मुकाबला अपेक्षाकृत करीबी रहा था।
आंकड़ों के मुताबिक, 2022 में 15 विधानसभा सीटें ऐसी थीं जहां जीत-हार का अंतर एक हजार से भी कम था। इनमें छह सीटें सपा ने जीती थीं, जबकि आठ सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवार विजयी रहे और एक सीट निषाद पार्टी के खाते में गई। इसके अलावा 14 सीटों पर जीत का अंतर एक हजार से दो हजार वोट के बीच था। इनमें बीजेपी ने सात, सपा ने चार, अपना दल (सोनेलाल) ने दो और कांग्रेस ने एक सीट जीती थी।
इसी तरह दो से तीन हजार वोट के अंतर वाली आठ सीटों में सपा ने पांच और बीजेपी ने तीन सीटें जीती थीं। तीन से चार हजार वोट के अंतर वाली सात सीटों में सपा को चार, बीजेपी को दो और अपना दल (एस) को एक सीट मिली थी। चार से पांच हजार वोट के अंतर वाली नौ सीटों में बीजेपी ने सात और सपा ने दो सीटों पर जीत दर्ज की थी। इन आंकड़ों को देखते हुए पार्टी कम अंतर वाली सीटों पर अपने संगठन और वोट आधार को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
सपा की व्यापक रणनीति में PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक समूहों के बीच संगठनात्मक पहुंच बढ़ाना भी शामिल है। पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद गैर-यादव ओबीसी, अति पिछड़े वर्ग और युवाओं के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने पर भी जोर दिया है। प्रस्तावित ‘PDA रथ यात्रा’ भी इसी सामाजिक और संगठनात्मक संपर्क अभियान का हिस्सा है।
27 हजार वोट बढ़ाने के लक्ष्य को बूथ स्तर के संगठन से भी जोड़ा जा रहा है। पार्टी के सामने 403 विधानसभा क्षेत्रों में अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों के हिसाब से संगठन को सक्रिय करने की चुनौती है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, पार्टी घर-घर संपर्क, तकनीक और स्थानीय स्तर पर मतदाताओं से संवाद बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है।
2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने 111 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि बीजेपी को 255 सीटें मिली थीं। 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन को उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से 224 क्षेत्रों में बढ़त मिली थी। हालांकि, लोकसभा और विधानसभा चुनाव अलग-अलग परिस्थितियों में होते हैं, इसलिए इन आंकड़ों को सीधे 2027 के संभावित परिणाम के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
सपा की ओर से 27 हजार अतिरिक्त वोट जुटाने का लक्ष्य ऐसे समय में सामने आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। पार्टी संगठन विस्तार, बूथ स्तर की सक्रियता और PDA के तहत सामाजिक समूहों के बीच संपर्क बढ़ाने पर जोर दे रही है। आने वाले महीनों में इस रणनीति को किस तरह जमीन पर लागू किया जाता है और पार्टी किन क्षेत्रों में अपने संगठनात्मक अभियान को प्राथमिकता देती है, यह उसकी चुनावी तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा।
