पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में पुलिस की एक बड़ी कार्रवाई ने पूरे राज्य में सनसनी फैला दी है। एक पूर्व सरकारी बस चालक के घर पर छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में नकदी और सोना बरामद हुआ है। शुरुआती जानकारी के अनुसार पुलिस को घर से करीब ₹20 करोड़ से अधिक की नकदी और लगभग 15 किलोग्राम सोना मिला। हालांकि नोटों की गिनती पूरी होने के बाद बरामद नकदी की रकम ₹28 करोड़ से अधिक बताई जा रही है। इतनी बड़ी मात्रा में नकदी और कीमती धातु मिलने के बाद पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के मुताबिक यह कार्रवाई बीरभूम पुलिस को मिली एक खुफिया सूचना के आधार पर की गई। पुलिस ने देर रात संबंधित व्यक्ति के घर पर छापा मारा, जहां कई बोरियों और संदूकों में बड़ी मात्रा में नकदी रखी हुई मिली। इसके अलावा सोने की ईंटें और बिस्कुट भी बरामद किए गए। नकदी की मात्रा इतनी अधिक थी कि उसकी गिनती के लिए कई कैश काउंटिंग मशीनों का सहारा लेना पड़ा। पुलिस अधिकारियों के अनुसार पूरे अभियान की वीडियोग्राफी कराई गई और बरामद संपत्ति को कानूनी प्रक्रिया के तहत जब्त कर लिया गया।
जांच के दौरान सामने आया कि जिस व्यक्ति के घर से यह संपत्ति बरामद हुई, वह पहले सरकारी बस चालक के रूप में कार्य कर चुका था। बाद में उसने पत्थर के कारोबार में कदम रखा और इसी व्यवसाय के जरिए उसकी आर्थिक गतिविधियां तेजी से बढ़ीं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी मात्रा में नकदी और सोना किस स्रोत से आया और क्या इसका संबंध किसी अवैध कारोबारी नेटवर्क, खनन या अन्य आर्थिक अपराधों से है। अधिकारियों का कहना है कि सभी वित्तीय लेन-देन और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार इस कार्रवाई का संबंध संगठित अवैध गतिविधियों की जांच से भी जोड़ा जा रहा है। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि जांच का दायरा अवैध खनन और उससे जुड़े आर्थिक नेटवर्क तक बढ़ाया गया है। हालांकि पुलिस ने अभी किसी भी राजनीतिक या आपराधिक संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और कहा है कि जांच पूरी होने के बाद ही तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि मामले में शामिल सभी व्यक्तियों से पूछताछ की जा रही है और यदि जरूरत पड़ी तो अन्य स्थानों पर भी छापेमारी की जाएगी।
इस बरामदगी ने राज्य की राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है। विपक्ष ने मामले को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है, जबकि सत्तापक्ष का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। राजनीतिक बयानबाजी के बीच पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच केवल उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर आगे बढ़ाई जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में बरामद नकदी और सोने का संबंध किसी अवैध आर्थिक गतिविधि से जुड़ता है, तो यह हाल के वर्षों में पश्चिम बंगाल की सबसे बड़ी वित्तीय बरामदगियों में से एक साबित हो सकती है। फिलहाल पुलिस बरामद नकदी के स्रोत, सोने के स्वामित्व, बैंक खातों, संपत्ति के दस्तावेजों और संबंधित लोगों के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में कई नए खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में लगी हुई हैं।
