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बंगाल में बीजेपी सरकार का बड़ा मंत्रालय बंटवारा, शुभेंदु अधिकारी ने दिलीप घोष और निशीथ प्रमाणिक को सौंपी अहम जिम्मेदारी

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पश्चिम बंगाल में पहली बार बनी Bharatiya Janata Party सरकार ने मंत्रालयों का बंटवारा कर दिया है। मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने अपनी नई कैबिनेट के प्रमुख मंत्रियों को अहम विभाग सौंपते हुए साफ संकेत दिया है कि उनकी सरकार प्रशासन, ग्रामीण विकास और क्षेत्रीय संतुलन पर खास फोकस करने वाली है। मंत्रालयों के बंटवारे के बाद बंगाल की राजनीति में नई हलचल तेज हो गई है और बीजेपी इसे “नए बंगाल की शुरुआत” बता रही है।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने वरिष्ठ बीजेपी नेता Dilip Ghosh को ग्रामीण विकास, पंचायत और पशु संसाधन विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी सौंपी है। माना जा रहा है कि ग्रामीण बंगाल में बीजेपी की पकड़ मजबूत करने और पंचायत स्तर पर संगठन को मजबूत बनाने के लिए दिलीप घोष को यह बड़ी भूमिका दी गई है। दिलीप घोष लंबे समय तक बंगाल बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और पार्टी के सबसे आक्रामक नेताओं में गिने जाते हैं।

वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री Nisith Pramanik को युवा कल्याण एवं खेल मंत्रालय के साथ-साथ उत्तर बंगाल विकास विभाग दिया गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तर बंगाल में बीजेपी की मजबूत पकड़ को देखते हुए यह विभाग निशीथ प्रमाणिक को देना पार्टी की रणनीतिक चाल है। उत्तर बंगाल लंबे समय से अलग राजनीतिक पहचान और विकास की मांग को लेकर चर्चा में रहा है। ऐसे में सरकार इस क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता देती नजर आ रही है।

महिला नेता Agnimitra Paul को महिला एवं बाल विकास और शहरी विकास विभाग सौंपा गया है। बीजेपी नेतृत्व उन्हें पार्टी के युवा और आधुनिक चेहरे के रूप में पेश कर रहा है। माना जा रहा है कि शहरी क्षेत्रों और महिला वोटर्स के बीच सरकार की पकड़ मजबूत करने में उनकी अहम भूमिका होगी। वहीं Ashok Kirtania को खाद्य एवं आपूर्ति तथा सहकारिता विभाग दिया गया है। आदिवासी नेता Khudiram Tudu को जनजातीय विकास, पिछड़ा वर्ग कल्याण और अल्पसंख्यक मामलों जैसे विभाग सौंपे गए हैं।

दिलचस्प बात यह है कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने फिलहाल गृह, वित्त और कार्मिक जैसे कई अहम विभाग अपने पास रखे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार के शुरुआती दौर में प्रशासनिक नियंत्रण मजबूत रखने के लिए उन्होंने यह फैसला लिया है। इससे पहले Mamata Banerjee भी मुख्यमंत्री रहते हुए कई महत्वपूर्ण विभाग अपने पास रखती थीं।

नई सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में कई बड़े फैसले भी लिए। उन्होंने केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय, लंबित परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने और निवेश बढ़ाने पर जोर दिया। बीजेपी सरकार का दावा है कि बंगाल में अब “डर की राजनीति” खत्म होगी और विकास आधारित शासन शुरू होगा।

राजनीतिक रूप से यह मंत्रालय बंटवारा इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि बंगाल में पहली बार बीजेपी ने पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई है। लंबे समय तक राज्य की राजनीति पर कब्जा रखने वाली Trinamool Congress अब विपक्ष में बैठी है। ऐसे में शुभेंदु अधिकारी की सरकार पर जनता की उम्मीदों का बड़ा दबाव भी रहेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि बीजेपी ने मंत्रालयों के जरिए क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन बनाने की कोशिश की है। उत्तर बंगाल, जंगलमहल और शहरी क्षेत्रों के नेताओं को प्रतिनिधित्व देकर पार्टी ने साफ संकेत दिया है कि वह पूरे राज्य में अपना राजनीतिक आधार मजबूत करना चाहती है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि बंगाल की नई बीजेपी सरकार अपने चुनावी वादों को किस तरह जमीन पर उतारती है।

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