पश्चिम बंगाल की राजनीति में गुरुवार को उस समय बड़ा संवैधानिक और राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला, जब राज्यपाल आर.एन. रवि ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद को बर्खास्त कर दिया। यह फैसला तब लिया गया जब ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव में हार के बावजूद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था। राज्यपाल के इस कदम के बाद बंगाल की राजनीति में भारी उथल-पुथल शुरू हो गई है और बीजेपी तथा तृणमूल कांग्रेस आमने-सामने आ गई हैं।
दरअसल, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया। चुनाव में बीजेपी को 294 में से 207 सीटें मिलीं, जबकि ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस केवल 80 सीटों पर सिमट गई। चुनावी हार के बाद सामान्य तौर पर मुख्यमंत्री इस्तीफा देते हैं, लेकिन ममता बनर्जी ने परिणामों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और दावा किया कि चुनाव “जनादेश नहीं बल्कि साजिश” का परिणाम हैं।
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने बीजेपी के पक्ष में काम किया और लगभग 100 सीटों पर जनादेश को “लूटा” गया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी बीजेपी से नहीं बल्कि चुनाव आयोग से लड़ रही थी। ममता ने यह भी कहा कि वह “हार मानने वाली नहीं हैं” और अब सड़क पर उतरकर संघर्ष करेंगी। हालांकि संविधान के अनुसार विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने के बाद नई विधानसभा के गठन की प्रक्रिया शुरू होते ही पुरानी विधानसभा स्वतः समाप्त मानी जाती है। पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 7 मई 2026 को समाप्त हो गया। इसके बाद राज्यपाल ने आधिकारिक आदेश जारी कर विधानसभा को भंग कर दिया और मंत्रिपरिषद को भी समाप्त कर दिया।
इस फैसले के साथ ही ममता बनर्जी का मुख्यमंत्री पद पर बने रहना संवैधानिक रूप से समाप्त हो गया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह भारतीय राजनीति के इतिहास की सबसे असामान्य घटनाओं में से एक है। किसी मुख्यमंत्री का चुनाव हारने के बाद इस्तीफा देने से इनकार करना बेहद दुर्लभ माना जाता है। इसी वजह से राज्यपाल को हस्तक्षेप करना पड़ा। संवैधानिक विशेषज्ञों के अनुसार राज्यपाल के पास यह अधिकार होता है कि यदि सरकार बहुमत खो दे और मुख्यमंत्री इस्तीफा न दें, तो वह मंत्रिपरिषद को बर्खास्त कर सकते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच बीजेपी ने इसे “लोकतंत्र की जीत” बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जनता ने स्पष्ट जनादेश दिया है और अब बंगाल में पहली बार बीजेपी की सरकार बनने जा रही है। बीजेपी ने 9 मई को कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शपथ ग्रहण समारोह आयोजित करने की तैयारी शुरू कर दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत कई बड़े नेता शामिल हो सकते हैं।
सुरक्षा के लिए हजारों पुलिसकर्मियों की तैनाती की तैयारी भी की जा रही है। दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस ने राज्यपाल के फैसले पर सवाल उठाए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी की गई है और वे इस मुद्दे को अदालत तक ले जा सकते हैं। ममता बनर्जी ने भी साफ कहा है कि वह राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन “INDIA” को मजबूत करेंगी और बीजेपी के खिलाफ संघर्ष जारी रखेंगी। उन्होंने बताया कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने उनसे संपर्क कर समर्थन जताया है।
राज्य में पहले से मौजूद राजनीतिक तनाव अब और बढ़ता दिखाई दे रहा है। चुनाव परिणामों के बाद कई जिलों में हिंसा और झड़पों की घटनाएं सामने आई हैं। बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी चंद्रनाथ रथ की हत्या ने माहौल को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है। सुरक्षा एजेंसियां लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है।
लगभग डेढ़ दशक तक सत्ता में रहने के बाद ममता बनर्जी का शासन खत्म होना भारतीय राजनीति की बड़ी घटनाओं में गिना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी बंगाल में अपनी पहली सरकार किस तरह चलाती है और तृणमूल कांग्रेस विपक्ष की भूमिका में किस रणनीति के साथ वापसी की कोशिश करती है।
