पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में जारी अंदरूनी संघर्ष के बीच बागी नेता और हाल ही में पार्टी से निष्कासित किए गए Ritabrata Banerjee को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में समर्थन मिलने का दावा किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, करीब 58 से 59 विधायकों ने उनके समर्थन में विधानसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपा है, जिसके बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनने की चर्चा तेज हो गई है।
बताया जा रहा है कि ऋतब्रत बनर्जी अपने समर्थक विधायकों और बागी नेता Sandipan Saha के साथ विधानसभा अध्यक्ष से मिले और समर्थन पत्र जमा किया। इस घटनाक्रम को टीएमसी के भीतर संभावित टूट और नए गुट के उभरने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पश्चिम बंगाल की विपक्षी राजनीति की दिशा बदल सकता है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब टीएमसी पहले से ही गंभीर आंतरिक संकट का सामना कर रही है। पार्टी ने कुछ दिन पहले ही ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को कथित “पार्टी विरोधी गतिविधियों” के आरोप में निष्कासित कर दिया था। इसके बाद दोनों नेताओं ने पार्टी नेतृत्व और संगठनात्मक फैसलों पर सवाल उठाए थे।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यदि विधानसभा अध्यक्ष इन समर्थन पत्रों को वैध मान लेते हैं तो बंगाल विधानसभा में विपक्ष की नेतृत्व संरचना पूरी तरह बदल सकती है। वहीं टीएमसी नेतृत्व इस पूरे घटनाक्रम को बगावत करार दे रहा है और पार्टी पर अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश में जुटा हुआ है। इसी बीच पार्टी ने राज्य में अपनी कई समितियों और फ्रंटल संगठनों को भंग करने का भी फैसला लिया है, जिसे संकट से निपटने की रणनीति माना जा रहा है।
इस राजनीतिक घटनाक्रम ने बंगाल की सियासत को एक बार फिर गरमा दिया है। अब सभी की नजर विधानसभा अध्यक्ष के अगले कदम और टीएमसी के भीतर चल रहे शक्ति संघर्ष पर टिकी हुई है, जो आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।
