पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर जारी सियासी घमासान लगातार गहराता जा रहा है। पार्टी से निष्कासित किए जा चुके नेता Ritabrata Banerjee के नेतृत्व में बागी विधायकों के एक बड़े समूह ने अलग रुख अपनाया है, जिससे ममता बनर्जी के नेतृत्व पर सवाल खड़े होने लगे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, बड़ी संख्या में विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी का समर्थन करते हुए उन्हें विधानसभा में विपक्ष का नेता बनाए जाने की मांग की है।
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए Humayun Kabir ने कहा कि “खेल तो अब शुरू होगा।” उन्होंने दावा किया कि टीएमसी के भीतर लंबे समय से असंतोष पनप रहा था और अब वह खुलकर सामने आ रहा है। हुमायूं कबीर ने यह भी दावा किया कि टीएमसी के 41 सांसदों में से करीब 20 सांसद भविष्य में ममता बनर्जी के नेतृत्व से अलग रुख अपना सकते हैं और पार्टी के भीतर नए नेतृत्व की मांग तेज हो सकती है।
राजनीतिक संकट उस समय और गहरा गया जब ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि विधानसभा अध्यक्ष ने उनके गुट को वैध विधायी दल के रूप में स्वीकार कर लिया है और उन्हें नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। बागी गुट का कहना है कि उसके पास करीब 58 से 60 विधायकों का समर्थन है, जिससे पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना बढ़ गई है।
दूसरी ओर, Mamata Banerjee और Abhishek Banerjee के नेतृत्व वाली टीएमसी इस संकट से उबरने की कोशिश कर रही है। पार्टी ने हाल ही में अपने कई प्रमुख संगठनात्मक ढांचे और फ्रंटल संगठनों को भंग कर दिया, जिसे बगावत रोकने और संगठन पर दोबारा नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बागी गुट का दावा सही साबित होता है तो यह टीएमसी के इतिहास का सबसे बड़ा आंतरिक विभाजन हो सकता है। आने वाले दिनों में ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी और बागी नेताओं के बीच शक्ति संघर्ष बंगाल की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।
