देश की सबसे महत्वपूर्ण नदियों में से एक यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को यमुना पुनर्जीवन (Yamuna Rejuvenation) परियोजना की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की, जिसमें दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सरकारों के साथ-साथ कई केंद्रीय मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में यमुना की सफाई, सीवेज प्रबंधन और नदी में गिरने वाले प्रदूषित पानी को रोकने के लिए व्यापक रणनीति पर चर्चा की गई।
बैठक के दौरान अमित शाह ने स्पष्ट कहा कि स्वच्छ और निर्मल यमुना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है और इसके लिए सभी संबंधित एजेंसियों को टीम भावना के साथ काम करना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि यमुना की सफाई केवल दिल्ली की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हरियाणा, उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार के बीच बेहतर समन्वय से ही इस लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
बैठक के बाद केंद्रीय जल शक्ति मंत्री C. R. Patil ने कहा कि सरकार ने यमुना को पूरी तरह साफ करने के लिए स्पष्ट समयसीमा तय की है और जनवरी 2028 तक नदी में उल्लेखनीय बदलाव दिखाई देगा। उन्होंने भरोसा जताया कि वर्तमान में चल रहे और प्रस्तावित प्रोजेक्ट समय पर पूरे हुए तो यमुना की स्थिति में ऐतिहासिक सुधार देखने को मिलेगा।
यमुना की सफाई के लिए सबसे बड़ा फोकस सीवेज ट्रीटमेंट सिस्टम को मजबूत करने पर रखा गया है। समीक्षा बैठक में बताया गया कि दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में अब तक 129 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा वर्ष 2027 तक 59 नए एसटीपी स्थापित किए जाएंगे ताकि बिना उपचारित गंदा पानी नदी में जाने से रोका जा सके।
बैठक में यह भी सामने आया कि यमुना में गिरने वाले प्रमुख नालों की सफाई का कार्य तेजी से चल रहा है। अधिकारियों ने जानकारी दी कि नदी में जमा गाद (सिल्ट) को हटाने का अभियान लगभग पूरा होने की ओर है और शेष कार्य भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा। अमित शाह ने निर्देश दिया कि निकाली गई गाद का वैज्ञानिक उपयोग किया जाए ताकि बारिश के दौरान वह दोबारा नदी में न पहुंचे।
प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में शामिल डेयरियों और गौशालाओं से निकलने वाले अपशिष्ट पर भी विशेष ध्यान दिया गया। बैठक में निर्णय लिया गया कि दिल्ली नगर निगम और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के बीच समझौता किया जाएगा, जिसके तहत डेयरियों से निकलने वाले गोबर और अन्य अपशिष्ट को बायोगैस और जैविक खाद में परिवर्तित किया जाएगा। इससे यमुना में सीधे प्रदूषण का दबाव कम होने की उम्मीद है।
गृह मंत्री ने परियोजना की निगरानी व्यवस्था को भी सख्त बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यमुना पुनर्जीवन से जुड़े सभी कार्यों की प्रगति की समीक्षा हर 20 दिन में की जाएगी। इसके लिए विस्तृत कार्ययोजना, स्पष्ट लक्ष्य और समयसीमा तय की जाएगी ताकि किसी भी स्तर पर देरी न हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि यमुना की सफाई भारत की सबसे बड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों में से एक है। राजधानी दिल्ली से गुजरने वाले हिस्से में नदी को सबसे अधिक प्रदूषण का सामना करना पड़ता है। घरेलू सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट और अवैज्ञानिक कचरा प्रबंधन लंबे समय से नदी की सेहत को प्रभावित करते रहे हैं। ऐसे में सरकार द्वारा अपनाई जा रही बहुस्तरीय रणनीति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राजनीतिक और पर्यावरणीय हलकों में भी इस बैठक को अहम माना जा रहा है। पिछले कई दशकों से यमुना की सफाई के लिए विभिन्न योजनाएं बनाई गईं, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाए। इस बार केंद्र सरकार ने नियमित समीक्षा, अंतरराज्यीय समन्वय और आधुनिक तकनीक के उपयोग पर विशेष जोर दिया है।
फिलहाल सरकार का दावा है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर परियोजनाओं को पूरा कर यमुना को स्वच्छ और पुनर्जीवित नदी के रूप में विकसित किया जाएगा। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले महीनों में जमीनी स्तर पर इन योजनाओं का कितना प्रभाव दिखाई देता है और क्या वास्तव में 2028 तक यमुना की तस्वीर बदल पाती है।
