उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज एक सार्वजनिक कार्यक्रम में राजनीतिक विरोधी दलों विशेष रूप से समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी (BSP) की सुप्रीमो मायावती पर एक बार फिर भारी आरोपों से हमला बोला है। उन्होंने सीधे नाम लिए बिना ही उन पर दंगाइयों, अपराधियों और उपद्रवियों का समर्थन करने का आरोप लगाया, जिससे राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पहले खराब रही और लोगों की सुरक्षा प्रभावित हुई थी। सीएम का यह बयान एक बार फिर से आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी बयानबाज़ी का हिस्सा बन गया है, जहाँ दोनों पक्ष अपने-अपने मताधिकारियों के बीच विश्वास बनाने की कोशिशें तेज कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि “2017 से पहले उत्तर प्रदेश में भय, आतंक, उपद्रव और दंगों का माहौल था”, और यह माहौल उन राजनीतिक ताकतों की जाति-आधारित राजनीति और अपराधियों तथा दंगाइयों के प्रति नरमी के कारण पैदा हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे लोग जिन्होंने “दंगाइयों के हमपरस्त” की तरह व्यवहार किया, उन्हीं के समर्थकों ने पहले सरकारी नीतियों का दुरुपयोग किया और यह सब राज्य की पहचान को संकट में डाल दिया। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वर्तमान सरकार ने कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कड़े कदम उठाए हैं, ताकि दंगे, उपद्रव और अराजकता जैसी घटनाओं से आम लोगों को सुरक्षा मिल सके।
योगी आदित्यनाथ ने यह बयान गोरखपुर में एक विकास परियोजना की घोषणा के अवसर पर दिया, जहाँ उन्होंने फ्लाईओवर और नई बुनियादी सुविधाओं का उद्घाटन भी किया। उन्होंने कहा कि अब “नया उत्तर प्रदेश” पहले की तुलना में सुरक्षित और विकसित है, और दंगे-भड़काऊ तत्वों को अब कोई स्थान नहीं मिलेगा। उनके इस बयान से संकेत मिलता है कि भाजपा सरकार भ्रष्टाचार, अपराध और उपद्रवियों के खिलाफ अपने अभियान को चुनावी मुद्दा बनाना चाहती है, और साथ ही विपक्ष की पुरानी नीतियों को ध्यान में रखना चाहती है।
राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि सीएम का यह हमला सिर्फ आरोपों का बयान नहीं, बल्कि यूपी के राजनीतिक माहौल में सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और आदर्श नेता के रूप में योगी आदित्यनाथ की छवि को मजबूती देना है। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले सुरक्षा-मुद्दों को लेकर वोटरों में चिंता की भावना का दोहन करना भाजपा के लिए रणनीतिक रूप से लाभदायक हो सकता है। वहीं, विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया अभी तक स्पष्ट रूप से सामने नहीं आई है, लेकिन संभावना जताई जा रही है कि समाजवादी पार्टी और BSP इस बयान पर अपना जवाब देंगे और मुख्यमंत्री के आरोपों का पलटवार करेंगे।
राजनीतिक समीक्षकों के अनुसार, उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और विविध सामाजिक ढांचे वाले राज्य में कानून-व्यवस्था, सामाजिक सद्भाव और विकास जैसी विषयें हमेशा चुनावी बहसों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस बयान ने इन मुद्दों को फिर से सरोकारों की केंद्र बिंदु में ला दिया है। आने वाले हफ्तों में इस बयान के प्रति विपक्ष का प्रतिक्रिया-चक्र और मीडिया-डिबेट को लेकर जनता में व्यापक चर्चा होने की उम्मीद है।
