
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत तेज हो गई है। कांग्रेस ने गठबंधन के तहत चुनाव लड़ने के लिए अपनी तैयारी शुरू कर दी है और करीब 125 से 150 सीटों पर दावा करने की योजना बनाई है। पार्टी की रणनीति को अंतिम रूप देने में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा अहम भूमिका निभा रही हैं। हालांकि, दोनों दलों के बीच सीटों का अंतिम बंटवारा अभी तय नहीं हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश कांग्रेस के नेताओं के साथ करीब तीन घंटे तक बैठक कर विधानसभा सीटों को लेकर चर्चा की। इस बैठक में लगभग 175 सीटों पर मंथन हुआ। कांग्रेस ने संभावित सीटों को तीन श्रेणियों में बांटा है। पहली श्रेणी में करीब 100 सीटें, दूसरी में 40 से 50 और तीसरी में 25 से 35 सीटें रखी गई हैं। पार्टी इन श्रेणियों के आधार पर अपनी मांग और उम्मीदवारों की तैयारी को व्यवस्थित करना चाहती है।
कांग्रेस की योजना शुरुआती चर्चा के बाद समाजवादी पार्टी को करीब 150 सीटों की सूची सौंपने की है। दूसरी ओर, ताजा रिपोर्टों में कहा गया है कि पार्टी गठबंधन वार्ता में 125 से 140 सीटों के बीच मांग रख सकती है। सीटों की संख्या पर अंतिम सहमति दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व की बातचीत के बाद ही बन पाएगी। नवंबर तक सीट बंटवारे को अंतिम रूप देने का लक्ष्य बताया गया है, लेकिन अभी इसे औपचारिक समझौता नहीं माना जा सकता।
कांग्रेस अपनी संभावित सीटों की सूची तैयार करने के लिए 2024 के लोकसभा चुनाव और 2017 के विधानसभा चुनाव के प्रदर्शन को आधार बना रही है। रिपोर्ट के अनुसार, 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी उत्तर प्रदेश की 38 विधानसभा सीटों पर आगे रही थी और 42 सीटों पर दूसरे स्थान पर थी। कांग्रेस इन 80 सीटों को अपनी संभावित सूची में शामिल करना चाहती है। इसके अलावा पार्टी अपने वरिष्ठ नेताओं और उन क्षेत्रों पर भी ध्यान दे रही है जहां उसका संगठन पहले से सक्रिय है।
सीटों के बंटवारे में रायबरेली, अमेठी और सहारनपुर का मुद्दा भी सामने आ सकता है। कांग्रेस इन क्षेत्रों की उन विधानसभा सीटों पर दावा करने की तैयारी में है, जहां फिलहाल समाजवादी पार्टी के विधायक हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, सपा की जीती हुई करीब एक दर्जन सीटें भी कांग्रेस की संभावित मांग में शामिल हो सकती हैं। इससे दोनों सहयोगी दलों के बीच बातचीत चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि सपा भी अपने मौजूदा राजनीतिक आधार और संगठन को ध्यान में रखकर सीटें तय करना चाहेगी।
कांग्रेस की इस तैयारी के पीछे 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में मिला प्रदर्शन भी एक महत्वपूर्ण संदर्भ है। उस चुनाव में समाजवादी पार्टी ने राज्य की 80 लोकसभा सीटों में से 37 और कांग्रेस ने छह सीटें जीती थीं। दोनों दलों ने विपक्षी गठबंधन के तहत चुनाव लड़ा था। अब कांग्रेस विधानसभा चुनाव में अपने संगठन को मजबूत करने के साथ गठबंधन में अधिक सीटें हासिल करने की कोशिश कर रही है। हालांकि, लोकसभा और विधानसभा चुनावों के समीकरण अलग हो सकते हैं।
समाजवादी पार्टी की ओर से भी कहा गया है कि गठबंधन और सीटों के बंटवारे पर अंतिम निर्णय शीर्ष नेतृत्व करेगा। अखिलेश यादव और राहुल गांधी की सहमति इस समझौते के लिए महत्वपूर्ण होगी। ऐसे में कांग्रेस की ओर से तैयार की जा रही सीटों की सूची फिलहाल बातचीत का आधार है, न कि तय हो चुकी सीटों का बंटवारा। आने वाले दिनों में दोनों दलों की बैठकों और नेताओं के बयानों से इस मुद्दे पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।



