Advertisement
बिजनेसलाइव अपडेट
Trending

₹1.60 लाख से नीचे फिसला सोना

Advertisement
Advertisement

देश में सोने की कीमतों में हाल के दिनों में हल्की गिरावट देखने को मिली है और सोना मनोवैज्ञानिक स्तर ₹1.60 लाख के नीचे आ गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती और वैश्विक आर्थिक संकेतों के कारण सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई और इसका असर घरेलू बाजार में भी देखने को मिला। रिपोर्ट के अनुसार हालिया कारोबार में सोना लगभग ₹1.59 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया।

हालांकि गिरावट के बावजूद सोने के दाम अभी भी ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक 24 कैरेट सोने की कीमत करीब ₹1,59,000 प्रति 10 ग्राम के आसपास बनी हुई है, जबकि 22 कैरेट सोना लगभग ₹1,45,000 प्रति 10 ग्राम के करीब बिक रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि हालिया गिरावट अस्थायी हो सकती है क्योंकि वैश्विक स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता के कारण निवेशक अब भी सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में देखते हैं।

दरअसल, सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय कारण जिम्मेदार होते हैं। मजबूत अमेरिकी डॉलर और वैश्विक बाजार में निवेशकों की रणनीति में बदलाव की वजह से सोने पर दबाव पड़ा है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता भी सोने की मांग को प्रभावित कर रही है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब डॉलर मजबूत होता है तो सोने की कीमतें अक्सर कमजोर पड़ जाती हैं क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत डॉलर में तय होती है।

विश्लेषकों का कहना है कि निवेशकों के लिए यह समय सावधानी से फैसला लेने का है। जिन लोगों का लक्ष्य लंबी अवधि का निवेश है, वे इस गिरावट को खरीदारी का अवसर मान सकते हैं। हालांकि अल्पकालिक निवेश करने वालों को बाजार के रुझान पर नजर रखनी चाहिए क्योंकि आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम के आधार पर कीमतों में फिर से उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

कुल मिलाकर, सोने की कीमतें भले ही थोड़ी नीचे आई हों, लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भू-राजनीतिक तनाव, महंगाई और केंद्रीय बैंकों की नीतियां सोने की दिशा तय करेंगी। इसलिए निवेशकों को जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय बाजार की चाल और आर्थिक संकेतों का ध्यान रखते हुए निवेश करना चाहिए।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
YouTube
LinkedIn
Share