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ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में आग, 9 की मौत; चश्मदीदों ने बताई हादसे की भयावह रात

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उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे पर बुधवार देर रात एक स्लीपर बस में भीषण आग लगने से 9 यात्रियों की मौत हो गई। हादसा जेवर थाना क्षेत्र में एक्सप्रेसवे के जीरो प्वाइंट से करीब 32 किलोमीटर आगे हुआ। बताया जा रहा है कि बस दिल्ली के कश्मीरी गेट से महोबा की ओर जा रही थी और घटना के समय ज्यादातर यात्री सो रहे थे। आग लगते ही बस में अफरा-तफरी मच गई और कई यात्रियों ने खिड़कियों तथा दरवाजे से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई।

हादसे के बाद सामने आए चश्मदीदों के बयानों से उस समय की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। रिंकी राजपूत ने बताया कि वह बस में सो रही थीं। अचानक किसी ने गेट बजाया और उन्हें आग लगने की जानकारी मिली। जब तक वह बाहर निकलने की कोशिश कर रही थीं, तब तक बस के अंदर काफी भीड़ हो चुकी थी। उन्होंने बताया कि हालात इतने खराब थे कि वह अपना सामान तक नहीं उठा पाईं और जूते भी नहीं पहन सकीं। वह सिर्फ अपना मोबाइल लेकर बाहर निकल पाईं। उनके मुताबिक, अंदर धुआं इतना ज्यादा था कि कुछ दिखाई नहीं दे रहा था और लोग एक-दूसरे को धक्का देकर बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे।

एक अन्य यात्री ने बताया कि वह बस की पिछली सीट पर सो रहा था। अचानक उसे आग लगने का पता चला और वह बाहर निकलने की कोशिश करने लगा। उसके मुताबिक, बस के अंदर धुआं भर चुका था और यात्रियों की भीड़ के कारण बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो गया था। उसने किसी तरह लोगों के बीच से रास्ता बनाया और बस से बाहर निकल सका। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग बस के आगे के हिस्से से शुरू हुई और देखते ही देखते तेजी से फैल गई।

हादसे को लेकर दर्ज एफआईआर में यात्री सुनील कुमार की शिकायत के आधार पर बस चालक और परिचालक की कथित लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के मुताबिक, बस में करीब 30 से 35 यात्री सवार थे और आग लगने से कुछ समय पहले ड्राइवर कैबिन की तरफ से जलने जैसी बदबू आ रही थी। सुनील के अनुसार, यात्रियों ने चालक और परिचालक को इसकी जानकारी भी दी थी, लेकिन आरोप है कि इसे गंभीरता से नहीं लिया गया और बस को तत्काल नहीं रोका गया। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ समय बाद ड्राइवर की सीट के पास से आग की लपटें दिखाई देने लगीं। यात्रियों ने शोर मचाकर बस रोकने की मांग की। इसके बाद आग तेजी से फैलने लगी और बस के अंदर धुआं भर गया। सुनील के मुताबिक, कुछ यात्री किसी तरह बाहर निकल गए, जबकि कई लोग आग और धुएं के कारण अंदर फंस गए। बाद में 9 यात्रियों को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हादसे में कई अन्य यात्रियों के घायल होने की भी सूचना है।

आग लगने के बाद बस के चालक और परिचालक के मौके से चले जाने की बात भी सामने आई है। आसपास मौजूद लोगों ने आग बुझाने वाले सिलेंडरों की मदद से यात्रियों को बाहर निकालने की कोशिश की। बताया गया कि बस के अंदर से आवाजें आने पर कुछ लोगों ने खिड़कियों के शीशे तोड़कर फंसे यात्रियों को बाहर निकालने का प्रयास किया। इसके बाद दमकल की टीमें मौके पर पहुंचीं और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।

हादसे के बाद सुरक्षा कारणों से यमुना एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों में यातायात को थोड़ी देर के लिए रोका गया। पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत-बचाव के साथ जांच शुरू की। बस को ठंडा करने के बाद घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य जुटाए गए। आग किस वजह से लगी, इसकी जांच की जा रही है। शुरुआती तौर पर अलग-अलग संभावनाओं पर जांच हो रही है, लेकिन आग का अंतिम कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी हादसे का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को घायलों के बेहतर इलाज और प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। हादसे में जान गंवाने वाले यात्रियों की पहचान और उनके परिजनों से संपर्क की प्रक्रिया भी की जा रही है। पुलिस एफआईआर में लगाए गए लापरवाही के आरोपों की जांच कर रही है और बस संचालन से जुड़े पहलुओं को भी जांच के दायरे में रखा गया है।

यमुना एक्सप्रेसवे पर हुआ यह हादसा एक बार फिर लंबी दूरी की स्लीपर बसों में यात्रियों की सुरक्षा और आपात स्थिति में बाहर निकलने की व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े करता है। फिलहाल पुलिस की जांच में यह स्पष्ट किया जाना बाकी है कि आग की शुरुआत कैसे हुई, यात्रियों को समय रहते इसकी चेतावनी मिली थी या नहीं और बस को तत्काल रोकने में कोई लापरवाही हुई थी या नहीं। जांच के निष्कर्ष के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

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