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SPIEF 2026 में पुतिन का बड़ा बयान: भारत की संप्रभुता की सराहना, ट्रंप और यूक्रेन युद्ध पर भी रखी बेबाक राय

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सेंट पीटर्सबर्ग। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (SPIEF) 2026 के पूर्ण अधिवेशन में वैश्विक राजनीति, भारत-रूस संबंधों, यूक्रेन युद्ध और अमेरिका के साथ संबंधों पर विस्तार से अपने विचार रखे। अपने संबोधन के दौरान पुतिन ने भारत को रूस का भरोसेमंद और रणनीतिक साझेदार बताते हुए कहा कि भारत हमेशा अपनी संप्रभुता और स्वतंत्र विदेश नीति के लिए जाना जाता रहा है।

अपने भाषण में पुतिन ने कहा कि भारत ने कभी भी बाहरी दबाव या किसी विदेशी शक्ति के निर्देशों के आधार पर अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं किया। उन्होंने भारत की तकनीकी क्षमता, आईटी क्षेत्र में उसकी वैश्विक पहचान और तेजी से बढ़ती आर्थिक ताकत की भी सराहना की। पुतिन ने कहा कि रूस और भारत के बीच संबंध केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि विश्वास, सम्मान और दीर्घकालिक साझेदारी पर आधारित हैं।

रूसी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत लगातार एक स्वतंत्र और संतुलित नीति अपनाता रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि दुनिया अब एकध्रुवीय व्यवस्था से निकलकर बहुध्रुवीय (Multipolar) व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, जहां भारत जैसे देशों की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है।

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का उल्लेख करते हुए पुतिन ने कहा कि उनके साथ विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई है और कुछ मामलों में दोनों देशों के बीच संवाद के रास्ते खुले हुए हैं। उन्होंने यूक्रेन संकट के समाधान के लिए बातचीत और समझौते की आवश्यकता पर भी जोर दिया। पुतिन का कहना था कि यदि सभी पक्ष व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाएं तो शांति की दिशा में प्रगति संभव है।

हालांकि यूक्रेन युद्ध को लेकर पुतिन अपने पुराने रुख पर कायम दिखाई दिए। उन्होंने दावा किया कि रूस अपने रणनीतिक लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और युद्ध के मैदान में स्थिति उसके नियंत्रण में है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि रूस बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन किसी भी समाधान में उसके सुरक्षा हितों का सम्मान होना चाहिए।

SPIEF 2026 ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब रूस और पश्चिमी देशों के बीच संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं। इसके बावजूद इस फोरम में दुनिया भर के लगभग 100 देशों के प्रतिनिधियों और हजारों प्रतिभागियों के शामिल होने की बात कही गई है। इससे यह संकेत मिलता है कि रूस वैश्विक आर्थिक मंचों पर अपनी उपस्थिति बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।

अपने संबोधन में पुतिन ने रूस की अर्थव्यवस्था का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि पश्चिमी प्रतिबंधों और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद रूस ने आर्थिक स्थिरता बनाए रखी है। उन्होंने ऊर्जा, तकनीक और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि भविष्य का विश्व अधिक संतुलित और सहयोग आधारित व्यवस्था की ओर बढ़ेगा।

भारत-रूस संबंधों पर चर्चा करते हुए पुतिन ने दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और व्यापारिक सहयोग को और मजबूत बनाने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने भारत को एक विश्वसनीय साझेदार बताते हुए कहा कि दोनों देशों के संबंध समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं और आने वाले वर्षों में यह साझेदारी और गहरी हो सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि SPIEF 2026 में पुतिन के बयान केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं थे, बल्कि उन्होंने वैश्विक शक्ति संतुलन, यूक्रेन युद्ध और भारत जैसे उभरते देशों की भूमिका पर भी महत्वपूर्ण संदेश देने का प्रयास किया। विशेष रूप से भारत को लेकर की गई टिप्पणियों को रूस की रणनीतिक प्राथमिकताओं के रूप में देखा जा रहा है।

फिलहाल पुतिन के इस संबोधन ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे दिया है। भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की खुलकर प्रशंसा, ट्रंप के साथ संवाद का उल्लेख और यूक्रेन युद्ध पर दोहराया गया रुख आने वाले दिनों में वैश्विक कूटनीति और भू-राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

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