
मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच छिड़ा युद्ध केवल सात दिनों में ही पूरे क्षेत्र के लिए बड़े संकट का कारण बन गया है। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़राइल ने संयुक्त सैन्य अभियान चलाते हुए ईरान के कई शहरों और सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। इस ऑपरेशन को इज़राइल ने “ऑपरेशन रोअरिंग लायन” और अमेरिका ने “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” नाम दिया। इन हमलों में तेहरान सहित कई प्रमुख शहरों में स्थित सैन्य ठिकानों, मिसाइल सिस्टम और सरकारी परिसरों को निशाना बनाया गया। सबसे बड़ा झटका तब लगा जब इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई शीर्ष सैन्य अधिकारी मारे गए, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और भी बढ़ गया।
हमले के तुरंत बाद ईरान ने भी पलटवार शुरू कर दिया। ईरानी सेना ने इज़राइल के कई शहरों के साथ-साथ खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। कतर, सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात में स्थित अमेरिकी बेस भी निशाने पर आए। इसके अलावा ईरान समर्थित संगठन हिज़्बुल्लाह ने लेबनान से इज़राइल पर रॉकेट और ड्रोन दागे, जिससे यह संघर्ष धीरे-धीरे पूरे मिडिल ईस्ट में फैलने लगा।
युद्ध के सात दिनों के भीतर ही हालात बेहद भयावह हो गए हैं। कई रिपोर्टों के अनुसार इस संघर्ष में अब तक ईरान में हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लेबनान, इज़राइल और अमेरिकी सैनिकों के भी हताहत होने की खबरें हैं। बड़े शहरों में लगातार हवाई हमले हो रहे हैं और हजारों लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है। इज़राइल और अमेरिका ने ईरान के सैन्य ढांचे और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाते हुए लगातार बमबारी तेज कर दी है।
इस युद्ध का असर केवल युद्धक्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के आसपास समुद्री यातायात पर भी असर डाला, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है और कई देशों ने संभावित आर्थिक संकट की चेतावनी दी है। साथ ही कई मध्य-पूर्वी देशों ने अपना एयरस्पेस बंद कर दिया और हजारों उड़ानें रद्द करनी पड़ीं, जिससे वैश्विक विमानन क्षेत्र भी प्रभावित हुआ।
दूसरी ओर दुनिया के कई देश इस संघर्ष को रोकने की अपील कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात कही है। वहीं अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से “बिना शर्त आत्मसमर्पण” की मांग करते हुए युद्ध को और तेज करने के संकेत दिए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह संघर्ष जल्द नहीं रुका तो यह पूरे पश्चिम एशिया को बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी इसका गंभीर असर पड़ सकता है।



