भारत की पहचान और विदेशों में भारतीयों के प्रति सम्मान का एक दिल छू लेने वाला किस्सा सामने आया है। मशहूर शायर महशर अफरीदी ने दुबई एयरपोर्ट पर अपने साथ हुई एक ऐसी घटना साझा की, जिसने उन्हें गर्व से भर दिया। खास बात यह रही कि मुश्किल समय में उनकी मदद करने वाला शख्स पाकिस्तान का रहने वाला था। उस लड़के ने मदद की वजह बताते हुए कहा, ‘आप इंडिया से हैं, इसलिए आपकी मदद की।’ शायर ने यह किस्सा हाथरस के एक कवि सम्मेलन में सुनाया, जिसका वीडियो अब चर्चा में है।
महशर अफरीदी ने बताया कि वह पहली बार किसी मुशायरे के सिलसिले में नहीं, बल्कि अपने एक दोस्त के बुलावे पर दुबई गए थे। जब वह वहां पहुंचे तो उनका दोस्त किसी काम से शहर से बाहर था। दोस्त ने उन्हें मैसेज करके एक ड्राइवर का नंबर दिया और बताया कि फोन करने पर वह उन्हें घर तक पहुंचा देगा। साथ ही घर की चाबी कहां रखी है, इसकी जानकारी भी दे देगा।
लेकिन यहां महशर के सामने एक परेशानी खड़ी हो गई। उनके पास दुबई में इस्तेमाल करने के लिए स्थानीय सिम कार्ड या फोन की सुविधा नहीं थी। उन्होंने सोचा कि किसी पीसीओ से कॉल कर लेंगे, लेकिन वहां उन्हें पीसीओ नहीं मिला। जब उन्होंने नया सिम लेने की कोशिश की तो उसकी कीमत करीब 1,200 रुपये बताई गई। सिर्फ एक दिन के लिए सिम खरीदने पर इतने पैसे खर्च करना उन्हें ठीक नहीं लगा।
ऐसे में वह एयरपोर्ट पर खड़े होकर परेशान हो रहे थे। तभी उनकी नजर एक ऐसे लड़के पर पड़ी, जो वहां मेहमानों को लेने आया था। महशर ने हिम्मत करके उससे मदद मांगी और कहा कि उन्हें एक जरूरी फोन करना है। लड़के ने पहले उनसे पूछा कि वह कहां से आए हैं। इस पर शायर ने जवाब दिया कि वह दिल्ली, भारत से आए हैं।
भारत का नाम सुनते ही उस लड़के का व्यवहार बदल गया। उसने बिना देर किए अपना मोबाइल फोन महशर की ओर बढ़ा दिया और उनसे नंबर बताने को कहा। महशर ने उसी फोन से अपने ड्राइवर को कॉल किया और उनकी परेशानी दूर हो गई। एक अनजान व्यक्ति की इस छोटी-सी मदद ने उनके लिए बड़ी मुश्किल आसान कर दी।
इसके बाद जब महशर ने उस लड़के का शुक्रिया अदा किया तो उसने जो जवाब दिया, वह उनके लिए सबसे ज्यादा हैरान करने वाला था। लड़के ने कहा, ‘सर, आप इंडिया से थे, इसलिए मैंने आपकी बात करा दी। अगर आप पाकिस्तान से होते, तो मैं कभी अपनी जेब से फोन नहीं देता।’ महशर को बाद में पता चला कि उनकी मदद करने वाला लड़का खुद पाकिस्तान का रहने वाला था।
इस घटना ने शायर को सोचने पर मजबूर कर दिया कि विदेश में भारतीय होने की पहचान किस तरह सम्मान और भरोसे का अहसास करा सकती है। उनके मुताबिक, एक पाकिस्तानी युवक का भारत से आए व्यक्ति के प्रति ऐसा व्यवहार उनके दिल को छू गया। उन्होंने इस अनुभव को सिर्फ फोन से मदद मिलने का मामला नहीं, बल्कि भारतीय पहचान से जुड़े गर्व के रूप में याद किया।
महशर अफरीदी ने अपने इस अनुभव को सुनाते हुए देशप्रेम से भरा एक शेर भी पढ़ा, ‘जमीन पर घर बनाया है मगर जन्नत में रहते हैं, हमारी खुशनसीबी है कि हम भारत में रहते हैं।’ उनके इस शेर और दुबई एयरपोर्ट के किस्से ने लोगों का ध्यान खींचा है। यह घटना दिखाती है कि कभी-कभी किसी अनजान व्यक्ति की छोटी-सी मदद भी लंबे समय तक याद रहने वाली कहानी बन जाती है।
