
देश में हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए आने वाले दिनों में सफर और महंगा होने वाला है। जेट फ्यूल (एविएशन टर्बाइन फ्यूल – ATF) की कीमतों में तेज उछाल के चलते एयरलाइंस कंपनियों ने टिकट किराए बढ़ाने का फैसला किया है। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ हफ्तों में जेट फ्यूल की कीमतें 85–90 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 150–200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जिससे एयरलाइंस की लागत पर भारी दबाव पड़ा है।
दरअसल, एयरलाइंस के कुल ऑपरेटिंग खर्च में फ्यूल की हिस्सेदारी करीब 25% तक होती है, ऐसे में कीमतों में इतनी बड़ी बढ़ोतरी का सीधा असर टिकट दरों पर पड़ना तय था। इसी वजह से IndiGo और Air India जैसी प्रमुख कंपनियों ने फ्यूल सरचार्ज बढ़ा दिया है। जानकारी के अनुसार, घरेलू उड़ानों पर सैकड़ों रुपये तक और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर हजारों रुपये तक अतिरिक्त शुल्क जोड़ा जा रहा है।
वैश्विक स्तर पर भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) के आंकड़ों के अनुसार, जेट फ्यूल की कीमतों में हाल के समय में लगभग दोगुनी बढ़ोतरी देखी गई है, जिसका प्रमुख कारण मध्य-पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है।
इस बढ़ती लागत का असर केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनियाभर की एयरलाइंस इससे प्रभावित हो रही हैं। भारत में भी हालात ऐसे बन गए हैं कि कई यात्रियों को अपनी यात्रा योजनाएं बदलनी पड़ रही हैं या वे ट्रेन जैसे सस्ते विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ईंधन की कीमतें जल्द नहीं घटीं, तो हवाई यात्रा आम लोगों की पहुंच से और दूर हो सकती है।
हालांकि, सरकार ने एयरलाइंस को कुछ राहत देने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। हाल ही में एयरपोर्ट चार्ज (लैंडिंग और पार्किंग फीस) में 25% तक की कटौती का फैसला लिया गया है, जिससे कंपनियों को अस्थायी राहत मिलने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, जेट फ्यूल की बढ़ती कीमतों ने विमानन उद्योग को मुश्किल दौर में डाल दिया है। इसका सीधा असर यात्रियों की जेब पर पड़ रहा है और आने वाले समय में हवाई सफर और महंगा हो सकता है।



