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लकी ड्रॉ में महंगी SUV जीतना पड़ा भारी

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महाराष्ट्र के गोंदिया जिले से एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां लकी ड्रॉ में लग्जरी कार जीतने के बाद एक सरकारी अधिकारी को निलंबन का सामना करना पड़ा। जानकारी के अनुसार गोंदिया में तैनात प्रोबेशनरी असिस्टेंट चैरिटी कमिश्नर दिशा केशवराव पजई को राज्य सरकार ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने एक निजी ज्वेलर्स द्वारा आयोजित लकी ड्रॉ में भाग लिया था, जिसमें उन्हें एक लग्जरी SUV कार इनाम के तौर पर मिली थी। हालांकि इस घटना के बाद सरकार ने इसे सेवा नियमों के उल्लंघन का मामला मानते हुए कार्रवाई की।

रिपोर्ट के अनुसार दिशा पजई ने एक ज्वेलरी दुकान के प्रमोशनल कार्यक्रम में हिस्सा लिया था, जहां ग्राहकों के लिए लकी ड्रॉ आयोजित किया गया था। इसी लकी ड्रॉ में उनका नाम निकला और उन्हें एक लग्जरी कार इनाम में मिली। लेकिन सरकारी सेवा में रहते हुए किसी निजी व्यावसायिक कार्यक्रम या लाभ से जुड़े आयोजन में बिना अनुमति भाग लेना नियमों के खिलाफ माना जाता है। इसी वजह से राज्य के विधि और न्याय विभाग ने उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया।

सरकारी आदेश में कहा गया है कि बिना पूर्व अनुमति के निजी संस्था के लकी ड्रॉ में भाग लेकर चार पहिया वाहन जीतना “महाराष्ट्र सिविल सेवा (आचरण) नियमों” का उल्लंघन है। इसी आधार पर उनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है। साथ ही निलंबन अवधि के दौरान उन पर कई शर्तें भी लागू की गई हैं। उन्हें बिना अनुमति गोंदिया मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी और वे इस दौरान किसी भी प्रकार का निजी व्यवसाय या नौकरी नहीं कर सकतीं।

निलंबन आदेश में यह भी कहा गया है कि यदि निलंबन के दौरान अधिकारी किसी निजी गतिविधि या व्यापार में शामिल पाई जाती हैं तो इसे अनुशासनहीनता माना जाएगा और आगे और कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। इस मामले ने प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा पैदा कर दी है, क्योंकि आमतौर पर लकी ड्रॉ जीतना खुशी का कारण माना जाता है, लेकिन सरकारी सेवा नियमों के कारण यह मामला विवाद का विषय बन गया।

विशेषज्ञों के अनुसार सरकारी अधिकारियों के लिए आचरण नियम काफी सख्त होते हैं। उन्हें किसी भी निजी कार्यक्रम, पुरस्कार, उपहार या आर्थिक लाभ से जुड़े आयोजन में भाग लेने से पहले विभाग की अनुमति लेनी होती है, ताकि किसी प्रकार के हितों के टकराव (conflict of interest) की स्थिति पैदा न हो। यही वजह है कि इस मामले में सरकार ने नियमों का हवाला देते हुए तत्काल कार्रवाई की है।

इस घटना के बाद प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि सरकारी सेवा में रहते हुए निजी आयोजनों में भाग लेने के नियम कितने सख्त हैं और उनका पालन करना अधिकारियों के लिए कितना जरूरी है।

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